श्रेणी: साहित्य

रामचन्दर शुक्ल जी इतिहास में कबीर, गोरखनाथ आ संत रैदास के महत्व ना देहलन

बीएचयू के निदेशक प्रा॰ सदानन्द शाही से भोजपुरिया अमन के सम्पादक डॉ॰ जनार्दन सिंह से लमहर बातचीत के एगो छोटहन अंश – राउर जनम कहां, कब भइल रहे आ प्राथमिक शिक्षा से लेके अन्तिम शिक्षा कब पूरा भइल, बतावल जा? हमार जनम कुशीनगर...

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भोजपुरी के विकासमान वर्तमान

– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल अपना प्रिय अंदाज, मिसिरी के मिठास आ पुरुषार्थ के दमगर आवाज का कारन भोजपुरी शुरुए से आकर्षण के केंद्र में रहल बिया. भाषा निर्भर करेले विशेष रूप से भौगोलिक कारन आ बोलेवाला लोगन के आदत, रुचि आ...

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गोरखपुर भोजपुरी संगम के सताइसवीं बइठकी

‘भोजपुरी में गद्य साहित्य के कमी बा आ भोजपुरी सम्पदा के सदुपयोग गद्य लेखन से ही सम्भव हो सकत बा.’ ‘कविता जब कवि के मजबूर करे लागे तबे कविता लिखल जाए के चाहीं.’ ‘भोजपुरी खाली अपनी रचनन के बल पर खड़ी...

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भोजपुरी उपन्यास "जुगेसर" – 3

– हरेन्द्र कुमार पाण्डेय अबले जवन पढ़नी ओकरा आगे …) सब लोग के पहिला गिलास खतम होखे पर आइल. सबकर नजर जुगेसर के भरल गिलास पर पड़ल. एक साथे सभे बोल उठल – ‘पहिला खतम कइल जाव. फेर इच्छा होई त लेब.’ जुगेसर...

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बतकुच्चन – ६१

पिछला हफ्ता बड़की पंचायत के साठ साल पूरा भइला पर इहे लागल कि साठा त अब भइल बाकिर सठियाइल जमाना से बा. अब त अधिकृत तौर पर सठिया गइल कहल जा सकेला ना त साठ साल पुरान बात पर लट्ठ ले के ना निकलल रहीत लोग. बुड़बक मरले बिराने फिकिरे....

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