श्रेणी: साहित्य

भोजपुरी उपन्यास "जुगेसर" – 3

– हरेन्द्र कुमार पाण्डेय अबले जवन पढ़नी ओकरा आगे …) सब लोग के पहिला गिलास खतम होखे पर आइल. सबकर नजर जुगेसर के भरल गिलास पर पड़ल. एक साथे सभे बोल उठल – ‘पहिला खतम कइल जाव. फेर इच्छा होई त लेब.’ जुगेसर...

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बतकुच्चन – ६१

पिछला हफ्ता बड़की पंचायत के साठ साल पूरा भइला पर इहे लागल कि साठा त अब भइल बाकिर सठियाइल जमाना से बा. अब त अधिकृत तौर पर सठिया गइल कहल जा सकेला ना त साठ साल पुरान बात पर लट्ठ ले के ना निकलल रहीत लोग. बुड़बक मरले बिराने फिकिरे....

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पंचायत बावना में एक पन्ना भोजपुरिओ खातिर

आजुवे इमेल से मिलल लिंक से डाउनलोड कइनी नोएडा से छपल भोजपुरी पंचायत पत्रिका के पहिलका अंक. कवर समेत बावन पन्ना के एह पत्रिका में भोजपुरी में एक पन्ना दिहल गइल बा. बाकिर सब कुछ हिन्दी में, कविता, कहानी, लेख सगरी हिन्दी के. हँ एह...

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गाजियाबाद में भइल भोजपुरी कवि सम्मेलन

पूर्वाचल भोजपुरी महासभा के मुख्य संरक्षक अशोक श्रीवास्तव के संयोजन में गाज़ियाबाद में पहिला बेर एगो भोजपुरी कवि सम्मलेन क आयोजन भइल. कवि सम्मेलन के अध्यक्षता वरिष्ठ कवि राजकुमार सचान ”होरी” आ संचालन भोजपुरी के...

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बतकुच्चन – ६०

रोए के रहनी तले अँखिए खोदा गइल. एह भोजपुरी कहाउत के सीधा मतलब त इहे निकलेला कि कुछ खराब सोचते रहीं कि ऊ होइओ गइल. पता ना अनिष्ट अनेसा में अइसन कवन खासियत होला कि सोचलीं त हो के रही. अगर कुछ गलत होखे के अनेसा मन में बनल बा त जान...

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