तुहीं बतावऽ
– डा॰अशोक द्विवेदी तुहीं बतावऽ जागी कबलें केकरा खातिर रात-रात भर? खाए के बा अखरा रोटी सूते के बा घास-पात पर! तुहीं बतावऽ जागी कबलें केकरा खातिर रात-रात भर? अपना खातिर, तोहरा खातिर भा अझुराइल सपना खातिर विघटब-टूटन-फिसलन...
Read More– डा॰अशोक द्विवेदी तुहीं बतावऽ जागी कबलें केकरा खातिर रात-रात भर? खाए के बा अखरा रोटी सूते के बा घास-पात पर! तुहीं बतावऽ जागी कबलें केकरा खातिर रात-रात भर? अपना खातिर, तोहरा खातिर भा अझुराइल सपना खातिर विघटब-टूटन-फिसलन...
Read Moreबुड़बक बझावल राजनीति में त बहुते होला बाकिर विज्ञानो में कम ना होखे. पिछला हफ्ता सुने के मिलल रहुवे कि मानसून केरल ले आ गइल बा आ अब अवले चाहऽता छपरा बलिया ले. बाकिर आसमान से अबही ले वइसहीं आग बरसत बा आ अब कहल जात बा कि मानसून थथम...
Read More– हरेन्द्र कुमार पाण्डेय अबले जवन पढ़नी ओकरा आगे …) मुजफ्फरपुर इमलीचट्टी होके ऊ यूनिवर्सिटी पहुंचलन. उहां केमिस्ट्री विभाग में गइलन. विभागाध्यक्ष के कमरा बंद रहे. ऊ अर्दली से पुछलन – ‘डॉ.शाही ?’...
Read MorePosted by Editor | Jun 12, 2012 | पुस्तक चर्चा, सरोकार |
बीएचयू के निदेशक प्रा॰ सदानन्द शाही से भोजपुरिया अमन के सम्पादक डॉ॰ जनार्दन सिंह से लमहर बातचीत के एगो छोटहन अंश – राउर जनम कहां, कब भइल रहे आ प्राथमिक शिक्षा से लेके अन्तिम शिक्षा कब पूरा भइल, बतावल जा? हमार जनम कुशीनगर...
Read More– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल अपना प्रिय अंदाज, मिसिरी के मिठास आ पुरुषार्थ के दमगर आवाज का कारन भोजपुरी शुरुए से आकर्षण के केंद्र में रहल बिया. भाषा निर्भर करेले विशेष रूप से भौगोलिक कारन आ बोलेवाला लोगन के आदत, रुचि आ...
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