श्रेणी: साहित्य

बतकुच्चन – ६५

बुड़बक बझावल राजनीति में त बहुते होला बाकिर विज्ञानो में कम ना होखे. पिछला हफ्ता सुने के मिलल रहुवे कि मानसून केरल ले आ गइल बा आ अब अवले चाहऽता छपरा बलिया ले. बाकिर आसमान से अबही ले वइसहीं आग बरसत बा आ अब कहल जात बा कि मानसून थथम...

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भोजपुरी उपन्यास "जुगेसर" – 4

– हरेन्द्र कुमार पाण्डेय अबले जवन पढ़नी ओकरा आगे …) मुजफ्फरपुर इमलीचट्टी होके ऊ यूनिवर्सिटी पहुंचलन. उहां केमिस्ट्री विभाग में गइलन. विभागाध्यक्ष के कमरा बंद रहे. ऊ अर्दली से पुछलन – ‘डॉ.शाही ?’...

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रामचन्दर शुक्ल जी इतिहास में कबीर, गोरखनाथ आ संत रैदास के महत्व ना देहलन

बीएचयू के निदेशक प्रा॰ सदानन्द शाही से भोजपुरिया अमन के सम्पादक डॉ॰ जनार्दन सिंह से लमहर बातचीत के एगो छोटहन अंश – राउर जनम कहां, कब भइल रहे आ प्राथमिक शिक्षा से लेके अन्तिम शिक्षा कब पूरा भइल, बतावल जा? हमार जनम कुशीनगर...

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भोजपुरी के विकासमान वर्तमान

– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल अपना प्रिय अंदाज, मिसिरी के मिठास आ पुरुषार्थ के दमगर आवाज का कारन भोजपुरी शुरुए से आकर्षण के केंद्र में रहल बिया. भाषा निर्भर करेले विशेष रूप से भौगोलिक कारन आ बोलेवाला लोगन के आदत, रुचि आ...

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गोरखपुर भोजपुरी संगम के सताइसवीं बइठकी

‘भोजपुरी में गद्य साहित्य के कमी बा आ भोजपुरी सम्पदा के सदुपयोग गद्य लेखन से ही सम्भव हो सकत बा.’ ‘कविता जब कवि के मजबूर करे लागे तबे कविता लिखल जाए के चाहीं.’ ‘भोजपुरी खाली अपनी रचनन के बल पर खड़ी...

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