Category: साहित्य

नीमिया रे करूवाइन

– डा॰ जनार्दन राय नीनि आइल निमन ह. जेकरा आँखि से इहां का हटि जाइला ओकर खाइल-पियल, उठल-बइठल, चलल-फिरल, मउज-मस्ती, हंसी-मजाक कुल्हि बिला जाला. अइसन जनाला कि किछु हेरा गइल बा, ओके खोजे में अदीमी रात-दिन एक कइले रहेला. निकहा...

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कुछु समसामयिक दोहा

– मुफलिस देई दोहाई देश के, ले के हरि के नाम. बनि सदस्य सरकार के, लोग कमाता दाम. लूटे में सब तेज बा, कहाँ देश के ज्ञान नारा लागत बा इहे, भारत देश महान. दीन हीन दोषी बनी, समरथ के ना दोष. सजा मिली कमजोर के, बलशाली निर्दोष....

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अउर ए बंद से महँगाई घटि गइल…हा..हा..हा..हा..

– प्रभाकर पाण्डेय “गोपालपुरिया” केतना खुशी के बाति बा कि काल्ह का बंद से महँगाई घटि गइल. हँ भाई! काँहें हँसतानि? घटल नइखे का? खैर हो सकेला रउरा खातिर ना घटल होखे पर एह बंद से हमार महँगाई त घटि गइल, मतलब हमरा त बहुते फायदा...

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अंधेर नगरी, चौपट राजा

– डा॰ सुभाष राय ई त सभे जानेला कि सूरुज उग्गी त सबेर होई इहो मालूम बा सबके कि चान राति क उगेला बहुते नीक लागेला फूल फुलाला त महकेला बाकिर ई केहू के ना पता कि महंगाई काहें बढ़ेले खून-पसीना बहा के भी किसान काहें सबकर मुंह...

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पलायन

– संतोष कुमार पटेल बाढ़, सुखाढ़ आ रोटी अजीब रिश्ता बा इनके जवन खरका देलख खरई खरई जिये के विश्वास साथे रहे के आस धकेल देलस दउरत रेल के डिब्बा में जहवां न बइठे क जगहे न साँस लेवे के साँस ऊँघत जागत दू दू रात के आँखिन में काटत...

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