Category: साहित्य

जरी दिया तोहरा याद में..

– नूरैन अंसारी अबकी बार एगो दिया तोहरा याद में जराएब. कलिख अपना मन के ओकरा रौनक से मिटाएब. कुछ ना मिलल नफरत कर के, हो गइनी अकेला. लोर भरल अंखिया से देखनी, हम दुनिया के मेला. छलकत अंखिया के गगरी के, हँसी से सजाएब. अबकी बार...

Read More

डर-भय

– डॉ. कमल किशोर सिंह डर बहुरुपिया बनि के आवे, हरदम दिल दुआरी पे. कइसे जान बचाईं आपन, कतना चलीं होशियारी से? चिकन चेहरा से हम डरीं की बढ़ल केश मूँछ दाढ़ी से? भय भगवान से केकरा नइखे, काहे ज्यादा भय पुजारी से ? पढ़ल लिखल लोगन...

Read More

बतकुच्चन – ४

ओह दिन एगो टीवी चैनल पर संगीत के रियलिटी शो देखत रहीं. एगो गायिका गीत गावत रही, “सईंया के थूरल देहिया….” मतलब उनकर रहे “सईंया से थुराइल देहि” के आ गावत रहली “सईंया के थूरल देहिया..”. कुछ...

Read More

बतकुच्चन – ३

एगो चर्चा में शब्द आ गइल कि रउरा त नायक हईं. बस मन में बिजली जस चमक उठल कि नायक के होला, नायक का ह ? आ याद पड़ल कि पिछला संस्करण में हम बतकुच्चन के दू गो कड़ी लिखले रहुवीं. फेर बात आइल गइल हो गइल आ बतकुच्चन दिमाग से उतरि गइल....

Read More

गीत नया हम गाईं कइसे ?

घात मीत के, बात प्रीत के, खेल कहानी हार जीत के, सबका के बतलाईं कइसे? गीत नया हम गाईं कइसे? दोसरा के का बाति चलाईं अनकर के का दोष देखाईं अपने हार सुनाईं कइसे ? गीत नया हम गाईं कइसे ? अपने चिन्ता, अपने फिकिरे कोल्हू के सभ बैल बनल...

Read More

Recent Posts