Category: साहित्य

रहे एगो आस रे…

– ओमप्रकाश अमृतांशु डहके मतरिया रे , छछनेली तिरिया, बाबुजी बांधत बाड़न, बबुआ के लाश रे, जिनिगी के जिनिका पे रहे एगो आस रे. ढरकत लोरवा के छोरवा ना लउके, भइल सवार खून माथवा पे छउंके, पारा-पारी सभेके धोआइल जाता मंगिया, बाबुजी...

Read More

‘सूर्पनखा’ का नाक के चलते असों होली ना मनाइब.

– नर्वदेश्वर पाण्डेय देहाती मनबोध मास्टर दुखी मन से कहलें – असों होली ना मनाइब. मस्टराइन पूछली- काहें? ऊ कहलें – सूर्पनखा की नाक की चलते. बात सही बा. जहां-जहां गड़बड़ बा, बूझीं सूर्पनखा के नाक फंसल बा. हम्मन क...

Read More

महानगर अउर जिलन के, का बतलाई हाल?

– नर्वदेश्वर पाण्डेय देहाती मंदिर में मंथन भइल, मिली जाम से मुक्ति? जाम-झाम क नाम पर, आपन-आपन युक्ति.. नगर निगम में धांधली, गेट में ताला बंद. लाठी चार्ज में बहल लहू,ऊपर से शांतिभंग.. महानगर में रोज मिलें, मरल-परल नवजात....

Read More

बनचरी (भोजपुरी के कालजयी उपन्यास के सतवीं कड़ी)

– डा॰ अशोक द्विवेदी फजीर होते, भीम आश्रम से निकलि के सीधे जलाशय का ओर चल दिहलन. माता के प्रातः दरसन आ परनाम का बाद, उनसे कुछ सलाह निर्देश मिलल. माता कहली, ”हम चाहत बानीं कि तूँ हिडिमा का सँगे अधिका से अधिका समय बितावऽ!...

Read More


अंजोरिया पर खोजीं -

आपन टिप्पणी, लेख, कहानी, कविता, विचार भेजे खातिर -

anjoria@rediffmail.com

अगर राउर रचना पहिला बेर आ रहल बा त आपन एगो रंगीन पासपोर्ट साइज फोटो साथ में जरूर डाल दीं.

Recent Posts

पाठक-पाठिकन के राय विचार प्रतिक्रिया..

🤖 अंजोरिया में ChatGPT के सहयोग

अंजोरिया पर कुछ तकनीकी, लेखन आ सुझाव में ChatGPT के मदद लिहल गइल बा – ई OpenAI के एगो उन्नत भाषा मॉडल ह, जवन विचार, अनुवाद, लेख-संरचना आ रचनात्मकता में मददगार साबित भइल बा।

🌐 ChatGPT से खुद बातचीत करीं – आ देखीं ई कइसे रउरो रचना में मदद कर सकेला।