Category: साहित्य

कहानी संग्रह ‘लाज लागेला’ क समीक्षा

– विजय शंकर पाण्डेय श्रीमती आशारानी लाल क कथा संग्रह ‘लाज लागेला’ पर कुछ लिखे में हमहीं के लाज लागत हौ. जइसे सूरज के दीया देखावे में लाज न लगै त देखे वाले ओके पागल जरूर कइहैं. इहै हमार हालत होई. तबो हम ढिठाई...

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पारंपरिक निरगुन

– डॅा० जयकान्त सिंह ‘जय’ (1) के रे जनम दिहलें, के रे करम लिखलें कवन राजा आगम जनावेलें हो राम ।। ब्रम्हाजी जनम दिहलें, उहे रे करम लिखलें, जम राजा आगम जनावेलें हो राम।। माई-बाप घेरले बाड़े मुँहवा निरेखत बाड़ें हंस...

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नेट पर भोजपुरी के एगो युग पूरा होखे का मौका पर

आजु से बारह बरीस पहिले भोजपुरी के पहिलका वेबसाइट अंजोरिया डाॅटकाॅम के शुुरुआत भइल रहुवे. तब से आजु ले बहुते कुछ बदल गइल. नेट पर सैकड़ो वेबसाइट हो गइल बाड़ी सँ भोजपुरी के. अलग बात बा कि भोजपुरी में ना चला के ओकनी में से अधिका...

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झीमी-झीमी बूनी बरिसावेले बदरिया

– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल झीमी-झीमी बूनी बरिसावेले बदरिया लागेला नीक ना । हँसे सगरी बधरिया लागेला नीक ना । सरग बहावेला पिरितिया के नदिया छींटे असमनवा से चनवा हरदिया धरती पहिरि लिहली हरियर चुनरिया लागेला नीक ना । नील रंग के...

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ना रही बाँस ना बाजी बाँसुरिया

– अभय कृष्ण त्रिपाठी “विष्णु” सच बोलहू में अब सवाल हो रहल बा, खुदके मिटावे खातिर बवाल हो रहल बा, ना रही बाँस ना बाजी बाँसुरिया ऐ विष्णु, कफ़न ओढावे खातिर कमाल हो रहल बा़॥ महाभारतानुसार अब गुरु शिक्षक हो रहल बा,...

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