Category: साहित्य

आसिफ रोहतासवी के दू गो गजल

-आसिफ रोहतासवी (एक) फेड़न के औकात बताई कहियो अइसन आन्ही आई. घामा पर हक इनको बाटे पियराइल दुबियो हरियाई. पाँव जरे चाहे तरुवाए चलहीं से नू राह ओराई. मोल, चलवले के बा जांगर रामभरोसे ना फरियाई. नाहीं कबरी बिन हिलसवले दिन-पर-दिन आउर...

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पाती के “प्रेम-कथा विशेषांक” पर बतकही

अभाव आ गरीबी पहिलहूँ रहे. दुख-दलिद्दर अइसन कि रगरि के देंहि क चोंइटा छोड़ा देव. लोग आपुस में रोइ-गाइ के जिनिगी बिता लेव, बाकिर मन मइल ना होखे देव. हारल-थाकल जीव के प्रेमे सहारा रहे. धीरज आ बल रहे. आजु एतना तरक्की आ सुबिधा-साधन का...

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कलयुग

– डॉ॰ उमेशजी ओझा रउरा मानी चाहे ना मानी, बाकिर धोखाघड़ी, ठगी आ एक दोसरा के टॉग खींचे के जमाना में ईमानदारी के मजे मजा बा. रउरा सभे के हमार बात अटपटा लागत होई, हमरा के पागल आ सनकी समझत होखब, कि कलयुग आ भ्रष्टाचार के जुग में...

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राजीव उपाध्याय के तीन गो कविता

(1) मन के चाकरी मन के चाकरी कइनी जीवन सगरी अब का करीं, हमके अब त बता द। मन के चाकरी कइनी जीवन सगरी॥ एने.ओने जानी, कुछू ना बुझाला, हवे ई ओसारा कि ह ई सिवाला। मन के चाकरी कइनी जीवन सगरी॥ खेत हवे कि बारी, कि गाँव के दुआर, नदिओ ना...

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भगवान के चटकन

– डॉ॰ उमेशजी ओझा अरे ए रबिन्दरा, आपन दिमाग ठीक राख, जमीन प रहेके सीख, हवा में मत उड़. सब कोर्इ के इजत होला. जोऽ, आ लईकी देख आउ आ बढिया से आपन बेटा सुरेश के बिआह क दे. ढेरी लईकी देखि के छोड़ छाड़ मत कर, भगवान सब देखत बानी....

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