Category: साहित्य

कबहुँ न नाथ नींद भरि सोयो

– कमलाकर त्रिपाठी बाँके बिहारी घर से दुई-तीन कोस चलल होइहँ कि ओनकर माई चिल्लइलिन, ”रोका हो गड़िवान, दुलहिन क साँस उल्टा होय गइल.“ बाँके लपक के लढ़िया के धूरा पर गोड़ राखि के ओहार हटाय के तकलन – ”का भइल रे?“ ”होई का ए...

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लाल निशान

– बिन्दु सिन्हा किर्र…. दरभंगा सकरी रोड पर सन्नाटा भइला से बस आउर ट्रक के चाल अइसहीं तेज हो जाला. झटका से ब्रेक लेला से खूब तेज चलत ट्रक एक-ब-एक किरकिरा उठल. ट्रक का डाला पर बइठल खलासी बीड़ी पीयत कवनो फिल्मी धुन...

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एही शौचालय की कारन ही ससुरा त्याग, नैहर में लौट गइली दुलहिनिया

– नर्वदेश्वर पाण्डेय देहाती बदली समाज अब स्वच्छता अभियाने से, जागरुक होत हई घर-घर बबुनिया. बाबुजी हमरा के ओइजा ना बिअहब, जवना घरे बनल ना होई लैटिनिया. देखीं महराजगंज प्रियंका सखी का कइली, ससुरा के छोड़ मायका गइली...

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डा॰ आशारानी लाल के कहानी संग्रह “लाज लागेला” के विमोचन

पिछला 10 मई 2015 का दिने दिल्ली के जेएनयू में भोजपुरी के महिला कथाकार डा॰ आशा रानी लाल के कहानी संग्रह “लाज लागेला” के विमोचन डा॰ नामवर सिंह, डा॰ मेनेजर पाण्डेय, डा॰ सचिदानंद सिन्हा आ लेखिका डा॰ आशा रानी लाल के हाथे...

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दू गो गजल ऋतुराज के

– ऋतुराज (1) चाननी जइसन रूपवा के तोड़ नइखे भोर, भोर हो गइल ऊ अॅंजोर नइखे. चुप कराईं त आउर ज़ोर से बाजे तोहरा पायल सन केहू मुँहजोड़ नइखे. तोहरा पाछे बहुत बा हमें ठोक लऽ हमरा हीया के पिरितिया के जोड़ नइखे. होई हमर किसानी तोहरा...

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