इयाद में बसल: पेंच व्याघ्र आरक्ष्य
- कनक किशोर

(यात्रा संस्मरण)

इयाद में बसल: पेंच व्याघ्र आरक्ष्य

छोड़ जाला आपनि इयाद, बस जाला ऊ दिल में
जगह कवनो खास, कवनो मनई आ केकरो प्रेम।

ई एगो सच्चाई ह, एह से इंकार ना कइल जा सकेला। हमार कवनो विशेष शौक नइखे बाकिर प्रकृति, अध्यात्म आ गांव से स्वाभाविक जुड़ाव रहल बा। प्रकृति आ गांव के इहे जुड़ाव के कारण नौकरी में रहतो आ जिनिगी के आपाधापी के बीच हर साल एक महीना के ई एल लेके पंद्रह दिन देशाटन में आ पंद्रह दिन गांव पर बीतत रहे।अइसे वन सेवा में रहला के कारण चालीस बरिस त वन आ वन प्राणियन जोरे कटल तबहूं जंगल से मन ना भरल।ई हमार सौभाग्य रहल कि आपन वन सेवा के शुरुआत विश्व प्रसिद्ध साल वन ‘ सारंडा ‘ से कइनीं। जंगल से इहे नजदिकाव कारण ह जे घूमा फिरा के हमरा के साहित्यों में चाहे – अनचाहे ऊ गद्य होखे भा पद्य प्रकृति, परिवेश, पर्यावरण आ गांव के बात करे खातिर मजबूर करेला।दरकत हिमालय, बिखरत गांव, बिलात जंगल,सूखात नदी,लूटात बालू, बिगड़त परिवेश देखि आंखिन में लोर आ जाला, जे शब्द रूप में कविता, कहानी, आलेख के रूप में सामने आ जाला।हम वन पदाधिकारी के प्रशिक्षण राज्य वन सेवा महाविद्यालय, बर्निहाट ( गौहाटी ) से 1986 – 88 बैच में कइले रहीं।ओह प्रशिक्षण में हमरा साथे चालीस गो देश के विभिन्न राज्यन के प्रशिक्षणार्थी रहे लोग।दू साल एक साथ रहे आ एक सेवा में रहला के कारण एगो परिवार के माफिक हो गइल रहे सब लोग आपस में। आपस में सोशल मीडिया पर जुड़ाव रहे बकिर नौकरी के आपाधापी में कुछ लोग के छोड़ केकरो से मिले के संयोग ना जुटल रहे। सेवानिवृत्त हो गइला पर आपस में मिले खातिर रणथंभौर में बैचमेट्स मीट के प्रोग्राम तीन साल पहिले बनल त प्रतिभागिता निश्चित कइला के बावजूद कोरोना के तृतीय लहर के आशंका के कारण ना भाग ले पवनीं। एह साल पेंच व्याघ्र आरक्ष्य, मध्यप्रदेश में दिनांक 23.10…20२4 से 25.10.2024 तक बैचमेट्स मीट के प्रोग्राम बनल त हमरो ओकर हिस्सा बने के मौका मिलल।एह बैचमेट्स मीट में इंतजार रहे छतीस साल बाद अपना बैचमेट्स से मिले के एक तरफ त दूसरा ओरि पेंच व्याघ्र आरक्ष्य के सुंदर प्रकृति,, वन आ वन्यजीव से मुलाकात के।ऊ इंतजार समाप्त भइल दिनांक 23.10.2024 के बारह बजे दिन में पेंच व्याघ्र आरक्ष्य के तुरिया गेट स्थित किपलिंग कोर्ट रिसोर्ट पहुंचला पर।

राँची से चलके रेल से नागपुर दिनांक 23.10.2024 के सबरे पहुंचला पर हमनी के बैचमेट बिहार के लल्लन झा नागपुर स्टेशने पर मिल गइले आ उहाँ से साथे एक गाड़ी से तुरिया कपिलिंग कोर्ट रिसोर्ट पहुंचनी जा जहाँ गुलदस्ता आ स्वागत पेय से बड़ी गर्मजोशी से रिसोर्ट प्रबंधन स्वागत कइलस। ई रिसोर्ट मध्यप्रदेश पर्यटन के रिसोर्ट ह जे प्रकृति के गोद में अवस्थित बा। पेड़ पौधन के बीच नदी के किनारे अवस्थित रिसोर्ट के काॅटेज पहिले नजर में मन मोह लेलस। हम आवंटित काॅटेज में जा नहान – धोआन कइके भोजन कक्ष में पहुंच भोजन करिके आराम करे के निर्णय लेनी।ओह दिन अपराह्न में कवनो विशेष कार्यक्रम निर्धारित ना रहे। साथी लोग धीरे-धीरे जुटत रहे।एक – दू आदमी छोड़ के सभे जुट गइल रहे। पेंच व्याघ्र आरक्ष्य दू भाग में प्रबंधन के हिसाब से बंटल बा कोर जोन(411 वर्ग किलोमीटर) आ बफर जोन ( 768 वर्ग किलोमीटर )।तुरिया खवासा बफर रेंज में अवस्थित बा।रात साढ़े सात बजे से कांफ्रेंस हॉल में मिले के रहे बैचमेट्स के परिवार मिलन सह परिचय कार्यक्रम में। कुल सत्रह गो साथी सपत्नीक आ कुछ लोग बेटा – बहू, बेटी के साथ पहुंचे रहे। पेंच व्याघ्र आरक्ष्य के पूर्व संयुक्त निदेशक किशोर कुमार गुरवानी एह बैचमेट्स मीट के मुख्य आयोजन कर्ता रहन जेकर साथ मध्यप्रदेश के दूगो अउर बैचमेट्स वाहने जी आ वास्कले जी देत रहन। इंट्रोडक्टरी सेशन में सब बैचमेट के गेरुआ उत्तरीय आ तुलसी माला से स्वागत कइल गइल। ई बुझाता उमिर के अगिला पड़ाव के देखत कइल गइल रहे।ओही दिन विदा के समय देवे वाला उपहार के झोला दे देल गइल सभके जेकरा में अनेकन समान रहे।ई तनी अटपटा लागल बाकिर गुरवानी जी स्पष्ट कइले कि ई एह से कइल गइल ह कि अगर कोई साइज आ कलर पसंद ना होखे त अपना मनमाफिक साइज आ कलर तुरिया गेट स्थित उपहार के दुकान, जहाँ से समान खरीदल गइल रहे, से आदमी बदल सके। स्वागत आ उपहार प्रदान के काम आपसे में एक-दूसरा के देके करावल गइल। कार्यक्रम के अंत में भारतीय वन सेवा के अधिकारियन के हाथे न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन,नई दिल्ली से सद्य प्रकाशित हमार हिन्दी काव्य संग्रह’ भाप बन उठती जिंदगी की गंध ‘ के लोकार्पण कइल गइल।एगो मधुर आ स्मरणीय एह आयोजन के बाद साथे खाना खाके आदमी राति विश्राम कइलस।

भारत में कुल पचपन व्याघ्र आरक्ष्य बा। व्याघ्र आरक्ष्य के स्थापना मुख्य रूप से बाघ संरक्षण आ बाघ के संख्या बढ़ावे के उदेस से कइल गइल बा। पिछला बाघ के गणना पेंच व्याघ्र आरक्ष्य में 2022 वर्ष में भइल रहे जेकरा में कुल बाघ के संख्या 77 पावल गइल रहे।बाघ के पर्यावास खातिर विशेष वन के जरूरत होला। पेंच व्याघ्र आरक्ष्य के वन बाघ पर्यावास खातिर एगो बढ़िया स्थल बा। आज के पेंच बाघ आरक्ष्य के क्षेत्र के आपन गौरवशाली इतिहास बा। ऐकर प्राकृतिक संपदा आ समृद्धि के वर्णन आइन-ए-अकबरी में मिलला। आरए स्ट्रेंडेल के ‘सिवनी – सतपुड़ा में कैंप लाइफ’, फोर्सिथ की ‘हाईलैंड्स ऑफ सेंट्रल इंडिया’ और डनबर ब्रैंडर की ‘वाइल्ड एनिमल्स ऑफ सेंट्रल इंडिया’ जइसन कई गो प्राकृतिक इतिहास के किताबन में एह क्षेत्र में प्रकृति के प्रचुरता के विस्तृत चित्रण देखे के मिलेला। स्ट्रेंडेल की अर्ध-आत्मकथात्मक ‘सिवनी’ रुडयार्ड किपलिंग के ‘जंगल बुक’ के पीछे प्रेरणा रहल बा।पेंच टाइगर रिजर्व आ ऐकरा आस-पास के इलाका रुडयार्ड किपलिंग के सबसे मशहूर कृति ‘ द जंगल बुक ‘ के मूल आधार ह। ‘ द जंगल बुक’ सिवनी के जंगल पर आधारित बा, जेकरा के अब ‘पेंच टाइगर रिजर्व’ कहल जाला। एकरा के’ मोगली लैंड ‘ आ ‘ गेटवे आफ टाइगर लैंड ‘ के नामों से जानल जाला।सर रुडयार्ड किपलिंग पुरान मध्य प्रदेश के देवास रियासत में सेवारत रहन। ऊ सिवनी के जंगल के दौरा कइले रहन आ ओह क्षेत्र के जंगल आ वन्य जीवन के बारे में जानकारी हासिल कइले रहन। सर रुडयार्ड किपलिंग के नाम पर रिसोर्ट के नाम रखल गइल बा जेकरा में हमनीं के ठहरल रहीं जा।

दिनांक 24.10.2024 के सुबह सभे किपलिंग कोर्ट के आँगन में जुटल जहाँ नव गो खुला जिप्सी हमनी के सफारी भ्रमण आ टाइगर देखावे खातिर खड़ा रहे।हर जिप्सी पर पांच – पांच लोग सवार हो गइले,साथ में एगो गाइग आ चालक।एक साथ आदमी तुरिया गेट पहुंचल जहां पर पेंच व्याघ्र आरक्ष्य प्रबंधन के कर्मी हम सभनी के एगो टाइगर प्रोजेक्ट के कैप पहिरा के बाघ संरक्षण के एगो रक्षा सुत कलाई पर बन्हल स।तुरिया गेट के भीतर के जंगल कर्मझिरी कोर रेंज में पड़ेला।तुरिया गेट से एक साथ चलके थोरे देर के बाद अलग – अलग दिशा मैं जिप्सी चल देलन स।छव बजे से एगारह बजे तक जंगल भ्रमण आ जंगल में मंगल भइल।वन के सुंदरता के वर्णन शब्द में कइल कठिन बा। शुष्क पर्णपाती सागावान वन आ शुष्क पर्णपाती मिश्रित वन एह परिक्षेत्र के मुख्य वन के रूप में मिलल जेकरा में सागवान, आसन, केंद, धौरा, सलई, महुआ, जामुन आदि के साथ बांस बहुतायत में मिलल।सागवान जंगल के बीच – बीच में बढ़िया ग्रास लैंड उपलब्ध रहे ।अइसन वन में घास – पात आ मांस खाए वाली दूनों तरह के वन जीव मिलेला। मुख्य रूप से एह वन में बाघ, तेंदुआ, जंगली भैंसा, सांभर चीतल, नीलगाय, बारहसिंगा आदि बा।अनेक दुर्लभ जीव अउर सुविधा वाला पेंच व्याघ्र आरक्ष्य पर्यटकन के तेजी से अपना ओरि आकषिर्त कर रहल बा। खूबसूरत झील, नदी, ऊंच पेड़ के सघन झुरमुट, रंगबिरंगे पक्षियन के कलरव, शीतल हवा के झोंका, सोंधी-सोंधी महकत माटी, वन्य प्राणियन के अनूठा संसार सचहूं प्रकृति के समूचे तन-बदन पर हरीतिमा के अइसन अनंत सागर रोम-रोम में सिहरन भर देत रहे। पेंच जंगल में कोलाहल करत 200 से अधिक प्रजाति के पक्षियन, पलक झपकते दिखे अउर गायब हो जात चीतल, सांभर अउर नीलगाय, भृकुटी तनले खाड़ जंगली भैंस आ लगभग 80 बाघ से भरल पड़ल बा आरक्ष्य।

अल्पाहार जंगल के एगो निरीक्षण भवन में भइल।ओहिजे ग्रुप फोटोग्राफी भइल। अल्पाहार के बाद जंगल परिभ्रमण करत रिसोर्ट लौट गइनीं जा।नेहान – धोआन करिके भोजन के बाद थोड़ा आराम कके फिर जंगल परिभ्रमण में तीन बजे निकलल आदमी त सात बजे शाम के लौटल। जंगली भैंसा, चीतल, सांभर, लंगूर खूब मिलल देखे के बाकिर बाघ मामा ना मिलले जेकरा खातिर जंगल के खाक दिन भर छनलस। हँ बाघ के पग मार्क आ अगल – बगल बाघ के उपस्थिति दिखावत हिरण आ लंगूर के पुकार (कालिंग) सुने के मिलल।

शाम के किपलिंग रिसोर्ट के खुला प्रांगन में संगीत भरल सांझि के आयोजन रहे हमनी खातिर। मुख्य रूप से बांसुरी वादन के कार्यक्रम रहे।साथ में बीच – बीच में विभिन्न राज्य के साथी लोगिन आपन प्रस्तुति देलस। वोही क्रम में हमहूं आपन दूगो भोजपुरी कविता के पाठ कइनीं। संगीत के साथ सुरुचिपूर्ण भोजन आ पेय के बेवस्था रहे। समूह नृत्य आ भोजन के साथ आयोजन मध्य रात्रि तक चलल।

अगिला दिन 25.10.2024 के भोजन के बाद दू बजे जंगल सफारी खातिर खुला जिप्सी पर एक साथे आदमी निकलल।आज रुखड़ कोर आ अरी बफर रेंज में परिभ्रमण के कार्यक्रम रहे। रुखड़ आ अरी रेंज के जंगल में अनेकन वन जीव के दर्शन भइल। बीच में रुखड़ में 1920 के बनल वन विश्रामालय में तनी आराम कके नेल्योर नेचर कैंप में चाय – पकौड़ी के आनंद लेलस लोग।ओहिजा गांव इको विकास समिति सुविधायुक्त आरामदायक टेंट हाउस के बेवस्था बीच जंगल में कइले बिया, जेकर रेट करीब 4500/ रुपया बा एक दिन के। रात के भोजन के इंतजाम अरी रेंज में 1903 के बनल सकाटा रेस्टहाउस में रहे। गोधुलि बेला में ओहिजा खातिर प्रस्थान कइलस आदमी त जंगल में सड़क पार करत बाघ मामा के बड़ी नजदीक से दर्शन भइल।बाघ मामा रोड पार करके रोड किनारे बांस जंगल में पसर के आराम करे लगले। सबके खूब बढ़िया से दर्शन भइल आ पेंच आवे के उदेस पूरा हो गइल। सकाटा रेस्टहाउस में भोजन करिके नव बजे रात चलके रिसोर्ट पहुंचल आदमी। 26.10.2024 के पांच बजे भोर में राँची खातिर पत्नी के साथे प्रस्थान कइनीं।

पेंच व्याघ्र आरक्ष्य प्रबंधन देखि वन्यजीव प्रबंधन के अनुकरणीय पाठ पढ़े के मिलल जे चालीस साल के वन सेवा में ना मिलल रहे। देश के एगो बेहतरीन व्याघ्र आरक्ष्य पेंच, ई कहीं त कवनो गलत ना होई।दू दिन के जंगल भ्रमण में एगो पेड़ के अवैध कटाई ना देखे के मिलल। जलस्रोत के भरमार आ घास के मैदान से सजल सघन जंगल बोलत नजर आवत रहे कि हम जंगली जीव के आपन घर हईं आ एकरे नतीजा आरक्ष्य में बढ़त बाघ के संख्या बा।वन कर्मी के अतिरिक्त चालक,गाइड आ जानवर ट्रैकर के रूप में हजारन स्थानीय निवासी के रोजगार त देइये रहल बा,साथे इको विकास समिति के माध्यम से ग्रामीण के मदद कर रहल बा आरक्ष्य प्रबंधन। उपहार सामग्री के निर्माणों से अनेकन लोग के रोजगार मिल रहल बा।देश के दूसरों बाघ आरक्ष्य के एह से सीख लेवे के चाहीं। अंत में किपलिंग कोर्ट रिसोर्ट के आथित्य के का कहल जाव, कुछ कहल कम होखी। जंगल के बीच पांच सितारा आवासीय आ भोजन प्रबंध जे मिलल ऊ अविस्मरणीय बा।पेंच टाइगर रिजर्व के बड़ पदाधिकारी से लेके छोट वन कर्मी तक के सेवा भाव आ समर्पण खातिर आभार आ साधुवाद कहल छोट शब्द होई।हम उहाँ सब के नमन करत एह गेट-टुगेदर के अविस्मरणीय बनावे खातिर आपन बैचमेट किशोर कुमार गुरवानी के ग्रांड सैल्यूट देत आपन संस्मरण के विराम देत अगिला बैचमेट्स मीट के आस लेले विश्राम खातिर जाए के पहिले कहब कि-

फिर मिलब दोस्त बरिस दू हजार पच्चीस-छब्बीस में
आस बा मन में, उल्लास बा मन में, ओह घड़ी दिन के।

कनक किशोर,
राँची, झारखंड।
चलभाष – 9102246536
—————————
कनक किशोर
राँची, मोबाइल – 9279200401

कनक किशोर, पेंच व्याघ्र आरक्ष्य. पेंच टाइगर रिजर्व, मध्य प्रदेश,

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