अँ से शुरू होखे वाला भोजपुरी शब्द

(एहमें अपरिवर्तित तत्सम आ आगत शब्दन के शामिल नइखे कइल गइल। एक बेर एकरा के धेयान से देखीं आ अगर रउरा कुछ जोड़े भा घटावे जोग लउके त बता दीं जेहसे एकरा के सुधारल जा सके। शब्द-बिटोर का काम में सबसे बेसी संख्या में सकारे-जोग सुझाव देबे वालन के एह शब्द-बिटोर के छपला का बाद मुद्रित प्रति सादर भेंट कइल जाई।)
| क्रम | शब्द | प्रकार | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|---|
| 1 | अँइच, अँइचा | वि. | भेंगा, देखते समय जिसके आँखो की पुतरी किसी दुसरी दिशा में देखती नजर आती है। |
| 2 | अँइचल | क्रि. | खीचल |
| 3 | अँइचा-ताना | वि. | ऐंंठा-तानकर अकड़ दिखाने वाला। |
| 4 | अँइचातानी | क्रि.वि. | खींचा-खींची |
| 5 | अँइछल | वि. | जादू टोना की काट किया हुआ |
| 6 | अँइठ | सं, पु. | घमंड, अकड़, ठसक |
| 7 | अँइठन | सं, पु. | ऐंठन, ममोड़, ममोर |
| 8 | अँइठल | वि. | घमण्ड में चूर |
| 9 | अँउगा | सं, पु. | क्रोध, गुस्सा |
| 10 | अँउगाइल | वि. | क्रोधित, गुस्साया हुआ |
| 11 | अँउघी | सं, स्त्री. | नींद |
| 12 | अँउघाइल | वि. / क्रि. | नींद में, सोया हुआ ; नींद के प्रभाव में |
| 13 | अँउधाइल | वि. | उलट कर रखा हुआ, पलट कर रखा हुआ, उल्टे पड़ा हुआ |
| 14 | अँउजा | क्रि. | संकट या झंझट में पड़कर घबराना, कबाड़ का ढेर |
| 15 | अँउजाइल | वि. | झल्लाया हुआ |
| 16 | अँउजा-पथार | सं. | कूड़े-कबाड़ का ढेर |
| 17 | अँउजारी | सं. स्त्री. | झंझट |
| 18 | अँउजाह | वि. | घबड़ा देने वाला, उलझन में डाल देने वाला |
| 19 | अँउटल | क्रि. | खौलाना |
| 20 | अँउटाइल | क्रि.,वि. | खौलाया हुआ |
| 21 | अँउड़ियाइल | क्रि./वि. | बादल कि तरह उमड़ा हुआ |
| 22 | अँउस | वि. | उमस, गर्मी |
| 23 | अँउसल | क्रि., वि. | किसी वस्तु, पात्र, वस्त्र को पहली बार उपयोग में लाना |
| 24 | अँउसाइल (अन्य रूप: गरमसल) | क्रि., वि. | उमस भरा, उपयोग में लाया जा चुका |
| 25 | अँकड़ा, अँकड़ी | सं. | कंकड़ |
| 26 | अँकवार, अँकवारी, अँकवारल | वि., क्रि. | गोद, गोदी लेना, गले मिलना, गले लगाना, आलिंगन |
| 27 | अँकवासल | वि. | गले लगाने के लिये बेचैन होना |
| 28 | अँकुआ, अँकुरा | सं. पु. | धातु का बना टेढ़ा कांटा जिससे किसी वस्तु को टाँगा या फँसाया जाय |
| 29 | अँकुरल, अँखुआइल | वि. | अँकुर निकलना |
| 30 | अँकुरी | सं. स्त्री. / क्रि. | अँकुरा हुआ अन्न ; बीया भा भाव से नया अँकुर निकलल। |
| 31 | अँकुसी | सं. पु. | पेड़ पर से फल तोड़ने के लिये किसी लम्बे दण्ड या लाठी के ऊपर लगाया हुआ अँकुरा |
| 32 | अँखिगर | वि. | जानकार, आँख वाला |
| 33 | अँखिजनी | सं स्त्री. | आँख में छोटा घाव या फुसरी |
| 34 | अँखिदेखुआ | वि. | जिसने किसी घटना को अपनी आँखो से देखा हुआ हो |
| 35 | अँखिफोर | वि. | खुली आँख |
| 36 | अँखिमुदउअल | सं स्त्री. | आँख मिचौनी का खेल |
| 37 | अँखुआ | सं / सं. | अँकुर ; बीया भा जड़ से निकलल नया कोमल अंकुर। |
| 38 | अँगइठी, अँगीठा, अँगीठी | सं. | सुलगा आग वाला पात्र या बरतन |
| 39 | अँगऊ | सं पु. | धनराशि या अन्नभण्डार से दान के लिया निकाला हुआ हिस्सा या अंश |
| 40 | अँगरल, अँगराइल | वि. | देर तक एक ही मुद्रा में बैठने के बाद होनेवाली झिनझिनी, लगातार होने वाला जलन भरा दर्द |
| 41 | अँगार | सं पु. | जलता हुआ ठोस टुकड़ा |
| 42 | अँगारी | सं स्त्री. | छोटा अँगार |
| 43 | अँगिया | सं स्त्री. | चोली, ब्लाउज, जालीदार चलनी या छलनी जिससे सत्तू आटा वगैरह छाना जाता है |
| 44 | अँगेछल | क्रि. | किसी जिम्मेदारी के लिये स्वेच्छा से तैयार होना |
| 45 | अँगेजल | क्रि. | सहन करना, सम्हाल कर रखना, |
| 46 | अँगेया | सं. | औपचारिक भोज के लिये स्वीकृति लेना |
| 47 | अँगुरी | सं स्त्री. / सं. | उँगली ; उँगली। |
| 48 | अँगुरियावल | क्रि. | उँगली करना |
| 49 | अँङना, आँङन | सं स्त्री. | आँगन |
| 50 | अँङरखा, अँगा, मिरजई | सं पु. | एक तरह का वस्त्र जो शरीर से चिपका रहता है |
| 51 | अँचर-धरउवा | सं पु | विवाह का एक संस्कार या रस्म |
| 52 | अँचवल | क्रि. | आचमन करना, खाना खाने के बाद हाथ धोना |
| 53 | अँजर-पँजर | सं. | ढाँचा |
| 54 | अँजरा-पँजरा | वि. / सं. | अगल-बगल में आना ; बहुत नजदीकी संगी-साथी आ आपन लोग। |
| 55 | अँजुरी | सं स्त्री. / सं. | दोनो हथेली मिला कर बना ग्रहण करने के लिये बना गट्ढा ; दुनो हथेली जोड़ के बनावल खोढ़रा। |
| 56 | अँजोर, अँजोरा | सं पु. | रोशनी, प्रकाश |
| 57 | अँजोर कइल | क्रि. | प्रकाशित कइल, अंजोर में ले आइल |
| 58 | अँजोरिया, अँँजोरिआ | सं स्त्री. | चन्द्रमा के रोशनी, शुक्ल पक्ष, भोजपुरी में पहला वेबसाइट |
| 59 | अँटकर | सं पु. | अनुमान, अंदाजा |
| 60 | अँटकल | वि. / क्रि. | फँसा हुआ, उलझल, उलझा हुआ, ठहरना ; अटक गइल; फँस गइल। |
| 61 | अँटकावल | क्रि. | किसी मामले या वस्तु को लटका देना, रोक देना, कहीं ठहरा देना |
| 62 | अँटल, अँटावल | क्रि, वि | सीमित स्थान में रखना, सीमित साधन का समुचित वितरण |
| 63 | अँटाव | सं पु. | रहने या रखने की जगह |
| 64 | अँटिया | सं स्त्री. | फसल का छोटा छोटा बंडल |
| 65 | अँटियावल | क्रि. | अँटिया बनाना |
| 66 | अँटी | सं पु. | विपरीत काम |
| 67 | अँठई | सं स्त्री. | जोंक |
| 68 | अँठानबे | वि. | नब्बे से आठ ज्यादा, 98 की संख्या |
| 69 | अँठियाइल | वि. | फल में गूठली आ जाना |
| 70 | अँठी | सं स्त्री. | गाँठ, बीज, गुठली, अधोवस्त्र में धन छिपाने की जगह |
| 71 | अँड़च | क्र वि. | बहुत अधिक, ठूंसना |
| 72 | अँड़चल | क्रि. | ठूंस-ठूस कर खाना |
| 73 | अँड़तालिस | वि. | चालीस से आठ ज्यादा, 48 की संख्या |
| 74 | अँड़सठ | वि. | साठ से आठ ज्यादा, 68 की संख्या |
| 75 | अँड़सल | क्रि./वि. | भीड़ भरी जगह में फँसा हुआ, स्थानाभाव वाली जगह पर होना ; कस के भरल भा एक-दोसरा से सट के अटकल। |
| 76 | अँखफोर | सं. | आँख खुलने या जन्म लेने की अवस्था; जन्म। |
| 77 | अँखियन | सं. | आँखों; आँखों में। |
| 78 | अँखिया | सं. | आँख। |
| 79 | अँखुआइल | क्रि./वि. | अँकुर निकलल; नया रूप में फूटल। |
| 80 | अँखुवाइल | क्रि./वि. | आँख में आँसू भर आइल; भाव से भींजल। |
| 81 | अँग-डँग | सं. | अंग-भंगिमा, चाल-ढाल और हाव-भाव। |
| 82 | अँगउछी | सं. | देह-मुँह पोंछे के छोट गमछा। |
| 83 | अँगड़ाइ | सं. | देह तान के आलस भा उमंग में खिंचाव लेवे के क्रिया। |
| 84 | अँगनइया | सं. | छोटा आँगन; घर का आँगन। |
| 85 | अँगनवा | सं. | अँगना के अपनापा वाला रूप। |
| 86 | अँगनवां | सं. | आँगन; घर के बीच का खुला स्थान। |
| 87 | अँगना | सं. | घर का आँगन। |
| 88 | अँगना-दुअरा | सं. | घर के आँगन आ सामने के दुआर वाला पूरा घरुआ परिसर। |
| 89 | अँगौछी | सं. | छोट गमछा। |
| 90 | अँचरा | सं. | साड़ी के अगिला खुला छोर; आँचल। |
| 91 | अँजुरिया | सं. | दोनों हथेलियों को जोड़कर बनी अंजुरी। |
| 92 | अँजोर | सं. | उजाला, प्रकाश। |
| 93 | अँजोरिया | सं. | अँजोर भरल रात भा उजास। |
| 94 | अँजोरिये | सं./क्रि.वि. | अँजोरिया ही; उजाले या प्रकाश में। |
| 95 | अँटावल | क्रि. | बढ़त चीज के रोकल, समेटल भा काबू में राखल। |
| 96 | अँड़सा-मँड़सा | वि. | सटा-सिमटा, घिरा या सँकुचित। |
| 97 | अँतरा | सं. | भीतर का कोना या छिपी जगह। |
| 98 | अँयड़ा-गोयड़ा | सं. | घर या बस्ती का अगल-बगल और पिछवाड़े का हिस्सा। |
| 99 | अँवाट-बँवाट | क्रि.वि. | बेतरतीब; बिना क्रम या सोच-विचार के। |

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