चिह्न आ चीन्ह : वर्तनी के गलती ना, अर्थ आ प्रयोग के भेद
बतकुच्चन 236

पहिला नजर में जबले संदर्भ साफ ना होखे, बहुते लोग के लाग सकेला कि चिह्न के चीन्ह भा चिन्ह लिखा गइल बा आ ई वर्तनी के गलती हवे। बाकिर हर अइसन अन्तर वर्तनी के गलती ना होखे। चिह्न आ चीन्ह के अर्थ आ इस्तेमाल में भेदो बा। भोजपुरी के मानक वर्तनी पर काम करत एक जगहा चिह्न के जिक्र आ गइल त सोचनी कि मूल काम से तनिका आराम ले के आज एही पर एगो बतकुच्चन लिख दीं।
बतकूचन के बतकुच्चन होखत देर ना लागे। एकही शब्द में लगातार दू गो दीर्घ स्वर आ गइला के पहिलका स्वर के ह्रस्व बनावे के आधार मानल जा सकेला। एहिजा ऊ के उ भइला का साथ च के द्वित्वो हो गइल बा। भोजपुरी कहावत ‘सेर पर सवा सेर’ एही बात पर नइखे कहल गइल, बाकिर कहे ला कहले जा सकेला कि जब दू गो बरियार में सामना हो जाव त एगो बरियार के दुबकी लगावल सही होखेला, ना त युद्ध होखे के अनेसा बन जाला।
चीन्ह माने निशानी, कवनो दाग, कवनो पहचान के जरिया। कवनो चीन्ह से पहचान होखे लागे त ऊ चिन्हासी के काम करे लागेला। एहिजा चीन्ह आ चिह्न के इस्तेमाल के भेद पर धेयान दिहल जरूरी बा। चिह्न कवनो प्रतीक के कहल जाला। जइसे कि स्वर के मात्रा-चिह्न अलग-अलग होला। मात्रा-चिह्न स्वर के लिखित प्रतीक होला।
जबकि चीन्ह ओह निशान भा अन्तर के कहल जाला जवना से कवनो पदार्थ भा जीव के पहचानल जा सके। करिया गाय आ करिया भईंस के अन्तर पूछला पर सही जबाब उहे दे पाई जे गाय आ भईंस के धेयान से देखले होखी। भईंस के गरदन पर कवनो लटकन ना होखे, गाय का गरदन पर लटकन लटकल रहेला। कुछ लोग एकरा के झाल कहेला। झालर वाला झाल। आ एह झाल भा लटकन के चीन्ह कहल जा सकेला, चिह्न ना। काहे कि एह झाल भा लटकन के दाग भा निशान ना कहल जा सके। ई निशानी जरूरे होला आ एही निशानी के चीन्ह कहल जाला।
भोजपुरी के आपन सुभाव से एगो शब्द से कई गो शब्द सहज भाव बन जाली सँ।
एहिजा सँ आ स के चरचो कर लीहल बेमतलब ना होखी। जब स के पहिले वाला शब्द में अनुनासिकता होखे त स लिखे के चाहीं आ जब स के पहिले वाला शब्द में अनुनासिकता ना होखे त बहुवचन ला एकरा के सँ लिखे के चाहीं। ‘लड़की जात बाड़ीं स’ लिखीं भा ‘लड़की जात बाड़ी सँ’। सही दुनु के मानल जाई। बाकिर ‘लड़की जात बाड़ी स’ भा ‘लड़की जात बाड़ीं सँ’ के गलत मान लिहला में हरज ना होखे के चाहीं।
हँ त बात चीन्ह के चलत रहुवे। आ एही चीन्ह से चिन्हार, अनचिन्हार, चिन्हासी, चिन्हल, चीन्हा-परची जइसन कई गो शब्द बन गइल बाड़ी सँ जवनन के अर्थ अलग-अलग बा। दायाँ हाथ पर मस्सा, चेहरा पर चेचक के दाग, गाल पर तिल भा घुँघराह बाल—ई सभ केहू के चिन्हासी हो सकेला। चिन्हासी चिन्हावे के काम करेला। चीन्ह के चीन्हा बना के कवनो जीव भा पदार्थ के चीन्हल सहज हो जाला।

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