बनचरी (भोजपुरी के कालजयी उपन्यास के पँचवी कड़ी)
– डा॰ अशोक द्विवेदी स्नान-पूजा का बाद जब कुन्ती अनमनाइल मन से कुछ सोचत रहली बेटा भीम का सँगे बाहर एगो फेंड़ का नीचे हँसी-ठहाका में रहलन स. हिडिमा के पास आवत देखि कुन्ती पुछली – – ‘बेटी ए स्थान के आसपास, कहीं...
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