Category: कविता

एगो मजदूर के दरद

– प्रभाकर पाण्डेय ‘गोपालपुरिया’ नून-तेल-भात कबो, कबो दलिपिठवा, कबो-कबो खाईं हम भुँजा अउरी मिठवा, कबो लिट्टी-चोखा त कबो रोटी-चटनी, कई-कई राति हम बिना खइले कटनी. कबो मिलि जाव एक मुठी सतुआ, कबो-कबो खिचड़ी खिया दे...

Read More

एन जी ओ

– संतोष कुमार पटेल शब्द्कोश के नया शब्द समाज के स्वस्थ/शिक्षित/परिष्कृत बनावे के साधन/प्रसाधन जे कह ल जवन कह ल बड़ा व्यापक बा ई शब्द जेकर अर्थ भले समझ गइल बिया सरकार बाकिर एकर मरम समुझे खातिर धोवे के पड़ी आंखिन से शरम काहे...

Read More

कलयुगी मेहरारु

– संतोष कुमार पटेल अब सीता सावित्री लक्ष्मी पार्वती जइसन नाम आउटडेटेड हो रहल बा काहे की अब लोग अपना आंख के पानी अपने धो रहल बा. लाज ओइसही बिलाइल जाता जईसे गरम तावा पर पानी के एगो बूंद रेगिस्तान में घडी भर के वरखा अब आँखिन...

Read More

आपन हो जाई अनजान

– नूरैन अंसारी आज जवन नया बा ऊ काल्हुवे पुरान हो जाई. ढेर चुप रहबऽ त आपनो अनजान हो जाई. जले एक में चलत बा घर, चलावत रहऽ, पता ना कब केकरा से दूर ईमान हो जाई. मत करऽ गुमान एतना तू अपना कोठी पर, एक दिन निवास तहरो शमसान हो...

Read More

उमेद

– संतोष कुमार पटेल जरल रोटी गरहन लागल चान बाकिर आस मरल ना कहियो त होई बिहान. राहू लागले ना रही हटबे करी आ भूख के रात कटबे करी. एही उमेद पर जिनिगी चलले. करेजा वाला जिएला डरपोक हाथ मलेला ओठ झुराला फाटेला जेठ के खेत नियर...

Read More

Recent Posts

🤖 अंजोरिया में ChatGPT के सहयोग

अंजोरिया पर कुछ तकनीकी, लेखन आ सुझाव में ChatGPT के मदद लिहल गइल बा – ई OpenAI के एगो उन्नत भाषा मॉडल ह, जवन विचार, अनुवाद, लेख-संरचना आ रचनात्मकता में मददगार साबित भइल बा।

🌐 ChatGPT से खुद बातचीत करीं – आ देखीं ई कइसे रउरो रचना में मदद कर सकेला।