गिरावट
– संतोष कुमार पटेल जब आदमी काठ-पत्थर हो जाला भाव से विचार से हियाव से त ओकरा मुंह के पानी उतर जाला जइसे मुरझा जाला फूल सेरा जाला सूरज दगिया जाला चान राहू के कटला पर डँसला पर जइसे कटेला घटेला चान ओइसहीं आदमी के जिनगी में...
Read More– अभयकृष्ण त्रिपाठी बढ़िया रहीत दुनिया में अन्हरिये बनल रहीत करिया चेहरा दुनिया से दरकिनार रहीत. याद आवेला जब सारा जग उजियार रहे, सोन चिरईया के नाम जग में बरियार रहे, मुँह में मिश्री आँखिन में आदर भरमार रहे, स्वर्ग से...
Read More– मुफलिस देई दोहाई देश के, ले के हरि के नाम. बनि सदस्य सरकार के, लोग कमाता दाम. लूटे में सब तेज बा, कहाँ देश के ज्ञान नारा लागत बा इहे, भारत देश महान. दीन हीन दोषी बनी, समरथ के ना दोष. सजा मिली कमजोर के, बलशाली निर्दोष....
Read More– डा॰ सुभाष राय ई त सभे जानेला कि सूरुज उग्गी त सबेर होई इहो मालूम बा सबके कि चान राति क उगेला बहुते नीक लागेला फूल फुलाला त महकेला बाकिर ई केहू के ना पता कि महंगाई काहें बढ़ेले खून-पसीना बहा के भी किसान काहें सबकर मुंह...
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