वापसी
– डा॰ सुभाष राय हम जरूर लउटब घाटी से निकलब स्याह चट्टान प रोशनी बिछावत रेगिस्तान की सीना से झरना जइसन फूटत बालू में जिनगी बोवत बढ़ब आ तुहार मटियाइल हाथ चूमि लेब. जब तुहरी बखरी में अन्हार कम होखे लगी तुहरी अंगना में झुंड क...
Read More– नूरैन अंसारी लोर बहत बा अंखिया से बरसात के तरह. हम जियत बानी जिनगी मुसमात के तरह. भरल बा घर कहे के अपने ही लोग से, बाकिर छटाईल बानी हम कुजात के तरह. जब से उठ गईल हमरा भरोसा के अरथी, हम बसाये लगनी अरुआइल दाल-भात के तरह....
Read More– हीरालाल हीरा 1) हारि के वानर सिन्धु कछार बिचारेले के अब प्रान बचाई? फानि पयोनिधि के दस कन्धर के नगरी, जियते चलि जाई? राक्षस के पहरा दिन-राति सिया के सुराग कहाँ लगि पाई? जो न पता लगिहें त सखा सुग्रीव से बोलऽ ना का जा...
Read Moreअभयकृष्ण त्रिपाठी अंग्रेजी के हुकुमत पर कलम चलावत बानी रेड, माई हो गइली ममी बाबूजी के करत बानी डेड।। अतना कइला पर भी अबही ले हम बैकवर्ड बानी, ठेकेदारन के कर दिहला बिना फारवर्ड मत जानी, अपना बचवन के विदेश भेज सबके गरियावत बा....
Read More
पाठक-पाठिकन के राय विचार प्रतिक्रिया..