Category: कहानी

महतारी

– केशव मोहन पाण्डेय जोन्हिया काकी पता ना केतना दिन के भइली कि टोला भर के सभे काकीए कहेला. ऊ अपना टूटही पलानी में अकेले अपना बाकी जिनगी से ताल ठोंकेली. उनकर पूत पुरन नवका दुनिया के निकललन. दू-तीन बार पंजाब कमाए गइल रहलन से...

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भोजपुरी भाषा साहित्य के एगो नया पहिचान दिहलसि "पाती"

“भोजपुरी दिशाबोध के वैचारिक साहित्यिक पत्रिका “पाती” एगो अइसन रचनात्मक मंच ह जवन भोजपुरी भाषा साहित्य के एगो नया पहिचान दिहलसि. एकरा रचनात्मक आंदोलन से जुड़ के अनेके लेखक राष्ट्रीय स्तर पर आपन पहचान...

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पोसुआ

– डा॰अशोक द्विवेदी दूबि से निकहन चउँरल जगत वाला एगो इनार रहे छोटक राय का दुआर पर. ओकरा पुरुब, थोरिके दूर पर एगो घन बँसवारि रहे. तनिके दक्खिन एगो नीबि के छोट फेंड़ रहे. ओही जा ऊखि पेरे वाला कल रहे आ दू गो बड़-बड़ चूल्हि. दुनों...

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लिट्टी

– केशव मोहन पाण्डेय चार-पाँच दिन से रोज गदबेरे कुक्कुर रोअत रहलें स. बुझात रहल कि ए गाँव में जरूर कुछ बाउर होई. सावन के मेघो तनी देर पहिलहीं दू दिन बाद साँस लेहले हवें. ऊँचास के पानी खलार में बह गइल बा. आ ओह राह में...

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