Category: कहानी

भोजपुरी भाषा साहित्य के एगो नया पहिचान दिहलसि "पाती"

“भोजपुरी दिशाबोध के वैचारिक साहित्यिक पत्रिका “पाती” एगो अइसन रचनात्मक मंच ह जवन भोजपुरी भाषा साहित्य के एगो नया पहिचान दिहलसि. एकरा रचनात्मक आंदोलन से जुड़ के अनेके लेखक राष्ट्रीय स्तर पर आपन पहचान...

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पोसुआ

– डा॰अशोक द्विवेदी दूबि से निकहन चउँरल जगत वाला एगो इनार रहे छोटक राय का दुआर पर. ओकरा पुरुब, थोरिके दूर पर एगो घन बँसवारि रहे. तनिके दक्खिन एगो नीबि के छोट फेंड़ रहे. ओही जा ऊखि पेरे वाला कल रहे आ दू गो बड़-बड़ चूल्हि. दुनों...

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लिट्टी

– केशव मोहन पाण्डेय चार-पाँच दिन से रोज गदबेरे कुक्कुर रोअत रहलें स. बुझात रहल कि ए गाँव में जरूर कुछ बाउर होई. सावन के मेघो तनी देर पहिलहीं दू दिन बाद साँस लेहले हवें. ऊँचास के पानी खलार में बह गइल बा. आ ओह राह में...

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आगी

– डा॰अशोक द्विवेदी जाड़े ठिठुरत, गांव के लोग, सांझि होते आड़-अलोत दुआर-मड़ई भा कउड़-बोरसी धऽ लेला. जे जहां बा, आ जइसे, सांझि के देंहि चीरत-सितलहरी आ घोरियावत कुहेस का डरे, आड़-अलम तक पहुंचे के तेजी मे रहेला. खाए के जौन दू चार...

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बदलाव से सहमति

– इं॰ राजेश्वर सिंह लाली के दर्जा पांच पास कइले के बाद छह से पढ़ाई खातिर दुइ किलोमीटर दूर बनल इन्टर कालेज में जाये के पड़ल. घर से तैयार होइके नव बजे सवेरे घर से निकले के पड़े. काहे से कि पइदले जाये के रहे. कवनो सवारी क साधन...

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