Category: कहानी

लिट्टी

– केशव मोहन पाण्डेय चार-पाँच दिन से रोज गदबेरे कुक्कुर रोअत रहलें स. बुझात रहल कि ए गाँव में जरूर कुछ बाउर होई. सावन के मेघो तनी देर पहिलहीं दू दिन बाद साँस लेहले हवें. ऊँचास के पानी खलार में बह गइल बा. आ ओह राह में...

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आगी

– डा॰अशोक द्विवेदी जाड़े ठिठुरत, गांव के लोग, सांझि होते आड़-अलोत दुआर-मड़ई भा कउड़-बोरसी धऽ लेला. जे जहां बा, आ जइसे, सांझि के देंहि चीरत-सितलहरी आ घोरियावत कुहेस का डरे, आड़-अलम तक पहुंचे के तेजी मे रहेला. खाए के जौन दू चार...

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बदलाव से सहमति

– इं॰ राजेश्वर सिंह लाली के दर्जा पांच पास कइले के बाद छह से पढ़ाई खातिर दुइ किलोमीटर दूर बनल इन्टर कालेज में जाये के पड़ल. घर से तैयार होइके नव बजे सवेरे घर से निकले के पड़े. काहे से कि पइदले जाये के रहे. कवनो सवारी क साधन...

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अभागा

– इं॰ राजेश्वर सिंह जब केहू के कवनो मसला समझ में ना आवेला त अपने से अधिक ज्ञानी मनई से शंका समाधान करे चलि जाला अउर समस्या के बारे में पूछि-ताछि के जानकारी कइ लेला. लक्ष्मण जइसन मनइ के अभागा लोगन के पहिचान कइले में शंका...

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दू गो छोटहन कहानी

(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 18वी प्रस्तुति) – विनोद द्विवेदी (एक) रोगी ले ढेर बैद मुहल्ला में रिंकू सिंह के बोखार लागल त पड़ोस के कई लोग देखे पहुँचल. केहु कहल काढ़ा, केहु कहल क्रोसिन आ केहू हकीम जी के चटनी...

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