राघव मास्टर
(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 16वी प्रस्तुति) – गिरिजा शंकर राय ‘गिरिजेश’ गांव में प्राइमरी स्कूल खुलते चारो ओर खुशी के वातावरण छा गइल. एकरा ले पहिले सब डेढ़गांवा जात रहे. जहिया ना जायेके मन करे कोइरिया का...
Read MorePosted by Editor | फरवरी 13, 2012 | कहानी, पुस्तक चर्चा, साहित्य |
(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 16वी प्रस्तुति) – गिरिजा शंकर राय ‘गिरिजेश’ गांव में प्राइमरी स्कूल खुलते चारो ओर खुशी के वातावरण छा गइल. एकरा ले पहिले सब डेढ़गांवा जात रहे. जहिया ना जायेके मन करे कोइरिया का...
Read MorePosted by Editor | फरवरी 7, 2012 | कहानी, पुस्तक चर्चा, साहित्य |
(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 15वी प्रस्तुति) – आशारानी लाल जब ना तब हमके बइठल देख के ऊ हमरा सोझा धमक जाले. दूर से चलल-चलल आवेले एही से थाकलो लउकेले. ओकरा तनिको अहस ना होला. इहो ना सोचेले, कि बड़ लोगिन के...
Read MorePosted by Editor | फरवरी 7, 2012 | कहानी, पुस्तक चर्चा, साहित्य |
(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 14वी प्रस्तुति) – राजगुप्त (एक) पान खइनी, गुटका-गुटकी ट्रेन अपना रफ्तार से दउड़त रहे. गर्मी के दिन ऊपर से बहुते भीड़ि रहे. सज्जी पसिन्जर गर्मी से बेहाल रहले. एही बीचे एगो चना...
Read MorePosted by Editor | फरवरी 5, 2012 | कहानी, पुस्तक चर्चा, साहित्य |
(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 13वी प्रस्तुति) – कृपाशंकर प्रसाद प्रकाश आ हम कइ बेरि होटल में संगे संगे होटलियवले रहनी जा। जब मांसाहार करे के होखे तबे होटलियाईं जा – ‘ई खस बात रहे।’ शुरुए से हम मार्क...
Read More– प्रभाकर पाण्डेय “गोपालपुरिया” कल्हिए रमेसर काका एगो टाली के परची दे गइल रहुअन. ऊँखी छिलवावे के रहुए ए से आजु सबेरवें ऊँखी छिलवावे खातिर पूरा गाँव की लोग के चला के हमहुँ ऊँखियारी में चलि गउँवीं. रउआँ सभें त जानते बानी की...
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