कहो फलाने अब का होई
– अशोक मिश्र सबेरे मार्निंग वॉक करे निकलनी त सोचली कि उस्ताद मुजरिम से मिल लिहल जाव. से वॉक से लवटति घरी उनुका ‘गरीबखाना’ पर पहुंच गइनी. हमरा के देखते मुजरिम खुश हो गइलन आ कहले, ‘आवऽ..आवऽ..बड़ा मौका पर आइल बाड़ऽ. तोहरा के...
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