आधा अल्पसंख्यकन के मुकदमा कवना कोर्ट में सुनल जाई?
भउजी हो! का बबुआ? अबकी त लागत बा कि होली के हत्या हो गइल. काहे बबुआ? देखतानी कि फगुआ के दू चार गो दिन रहि गइल बा बाकिर कतहूँ केहू का देंहि पर रंग नइखे लउकत. हो सकेला कि लोग महाराष्ट्र का सूखा का चलते एह साल होली पर रंग ना खेलत...
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