श्रेणी: सतमेझरा

चमचा-प्रधान विश्व करि राखा

– आलोक पुराणिक उ चमचागिरी कइलसि, ओकर प्रमोशन हो गइल – काम के मामिला अपना के बड़हन ज्ञानी समुझनेवाला एगो दोस्त हमेशा भुनभुनात रहेले. देखीं, उ बास के बीबी केला हौज-खास से जलेबी ले आवेला, ओकरा चार बेर इंक्रीमेंट मिल...

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मोदी मौनी बाबा काहे बन गइले ?

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद से अचके में रामचेला पूछले, बाबा हो! ई आपन मोदी जी आजुकाल कुछ बोलत काहे नइखन ? बाबा कहले, अब तूं ही बतावऽ कि मोदी जी सरकार चलावस कि बकबकास. अरे सरकार चलावल कवनो बैलगाड़ी चलावल ना नु ह कि जबले...

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सही मेहनत उर्फ परम चालू के सफलता-कथा

– आलोक पुराणिक गुरुदेव दीक्षांत समारोह में घोषित कइलन – हम तीन गो टापर घोषित करत बानी – कर्मठ, चालू, अउर परमचालू. हमरा उमेद बा कि एह महाविद्यालय से बहरि जा के ई लोग हमार नाम रोशन करी. एह मौका पर इहो बतावत बानी...

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वर्ल्ड क्लास स्टेशनन पर खइनी डिटेक्टर लगावल जरूरी

– जयंती पांडेय मंगलवार के रेल बजट देखि सुनि के बाबा लस्टमानंद कहले कि ‘विश्व स्तरीय रेल गाड़ी तऽ हमरा पसंद नइखे.’ आज के रेलगाड़ी के सफर के आपन मजा बा. सफर के समय , रामचेला जान जा कि एगो अभूतपूर्व आनंद होला. आजु के हमनी के...

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भउजी समुझवली दिल्ली के दाँवपेंच

भउजी हो ! अरे बबुआ ! आजु सूरुज केने से उगल रले हँ ? का भउजी, फेर शुरू हो गइलू ? त का करीं ? कतना महीना बाद भउजी याद पड़ली ह, याद बा ? छोड़ ई सब. आजु कुछ अझूराइल सझुरवावे आइल बानी. का ? दिल्ली में सरकार बनावे के नाम पर कवन तमाशा...

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