(ई एकदम एगो काल्पनिक कहानी ह, जेकर कवनो जीवित भा मृत व्यक्ति, देश, भा असली संस्था से सीधा संबंध नईखे। एकरा के सिर्फ मनोरंजन आ व्यंग्य का रूप में पढ़ल जाव।)
बज़ार के बेताज बादशाह: जवना पर कउनो क़ानून लागू नईखे होत
आज के ज़माना में लोग कहेला कि बज़ार ‘मांग अउर आपूर्ति’ (Demand and Supply) से चलेला। बाकिर ई बात अब पुरान हो गइल बा। अब बज़ार चलेला एगो ख़ास आदमी के ‘मुलर’ (धुन/मूड) अउरी उनका हाथ में पकड़ल मोबाइल फ़ोन से। दुनिया के बड़-बड़ देश के सरकारी नियामक, जइसे कि ‘सेबी’ (SEBI) भा फेर सात समुंदर पार के कउनो बड़हन जांच एजेंसी होखे, सब उहाँ का सोझा पानी भरेले। कउनो एजेंसी के एतनो औक़ात नईखे कि उहाँ का के नोटिस भेज सके भा पूछ सके कि “हुज़ूर, रउआ ई का लिख देहनी?”उहाँ के अइसन ‘मार्केट ऑपरेटर’ (Market Operator) हवीं, जवना का उंगली के एगो इशारा पर वॉल स्ट्रीट से लेके दलाल स्ट्रीट तक के बड़-बड़ धुरंधर लोटा-थारी लेके नाचे लागेंले। नियम-क़ानून त छोट-मोटा चोरी करे वाला खातिर होला, जे बज़ार के मालिक ह, ओकरा खातिर कउनो क़ानून कइसन?

‘ट्रुथ सोशल’ के चाबुक अउर भूचाल के खेलउहाँ के कउनो बड़हन भाषण ना देवे के पड़ेला। ना कउनो प्रेस कॉन्फ्रेंस करे के पड़ेला। बस सकारे उठ के, चाय के चुस्की लेत-लेत अपन ख़ास सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर चार शब्द के एगो पोस्ट डाल देवेले। बस! ओकरा बाद जे तबाही मचेला, उ देखे लायक होला।
मान लीं कि उहाँ के लिख देहनी: “फलाना देश के सामान पर अब 100% टैक्स लागी, बहुत लूट भइल!”ई पोस्ट अइला के ठीक दू मिनट का अंदर ओ देश के सब कंपनी के शेयर अइसे पाताल में गिरे लागेला, जैसे आसमान से कउनो उल्कापिंड गिरत होखे। बज़ार के बड़-बड़ पंडित टीवी पर आके चश्मा ठीक करत-करत थाकि जालन कि ई का भइल, बाकिर तब तक खेल हो चुकल रहेला।
सिपहसालारन (Cronies) के ‘अंतिम सच’ अउर छप्परफाड़ कमाई
अब असली मज़ा त ए खेल के पीछे के रणनीति में बा। डीटी (DT) जब पोस्ट लिखेले, उ बात दुनिया के त बाद में पता चलेला, बाकिर उनके कुछ ख़ास ‘चिट्ठिया रसूल’ यानी क्रोनिक्स (Cronies) के ई बात घंटा भर पहिलही मालूम रहेला। उहाँ के करीबी लोग बज़ार के कमान थामे खातिर पहले से ‘पोजीशन’ बना के बैठ जाले।
छप्परफाड़ कमाई आ तेल के बज़ार पर कब्ज़ा
खेल नंबर 1: अगर डीटी कउनो कंपनी के तारीफ़ करे वाले बाड़े, त करीबी लोग ओकर लाखों-करोड़ों शेयर कौड़ी के भाव पहिलही खरीद के रख लेवेले। पोस्ट अइला के बाद दाम आसमान छूवेला, आ ई लोग बेच के अरबों के ‘विंडफॉल प्रॉफिट’ (Windfall Profit) कमा के पतली गली से निकल जाले।
खेल नंबर 2: अगर कउनो सेक्टर के बर्बाद करे के बा, त ई लोग पहिलही ‘शॉर्ट सेलिंग’ (Short Selling) क के बैठ जाला। पोस्ट आवेला, कंपनी डूबेला, आ ई लोग अरबपति बन जाला। एह खेल में आम जनता (Retail Investors) त बस भेड़-बकरी नियन हिया-हुआँ भागेले आ अंत में ओकर सब पूंजी साफ़ हो जाला।
तेल के बज़ार: डीटी के ट्यून पर नाचत ‘क्रूड ऑयल’
शेयर बज़ार त छोट चीज़ बा, असली खेल त तेल (Crude Oil) के बज़ार में होला। दुनिया के बड़-बड़ तेल उत्पादक देश (जवना के लोग ओपेक कहेला), उ लोग साल भर बैठक करेला कि तेल के दाम कइसे बढ़ावल जाव। बाकिर डीटी के एगो ट्वीट भा पोस्ट ओ सब बैठक पर पानी फेर देवेले।उहाँ के बस लिख देवे के बा: “तेल के दाम बहुत बेसी बा, हम बज़ार में अपना देश के तेल से बाढ़ ला देब!”एतना सुनतहीं कच्चा तेल के दाम प्रति बैरल 5 से 10 डॉलर नीचे गिर जाला। तेल के कुआँ खोदे वाला देश हाथ मलत रह जाले, आ जे लोग पहिले से ‘मंदी’ के दांव लगवले रहे, उ लोग महलों में नोट गिने लागेला। पूरा तेल मार्केट डीटी के उंगली के ट्यून पर कत्थक नाचेला।
क्रिप्टो के मायाजाल: कुकुर के फोटो वाली करेंसीओ रातेरात राजा
शेयर अउर तेल त छोड़ दीं, असली नौटंकी त ‘क्रिप्टोकरेंसी’ (Cryptocurrency) के बज़ार में होला। इहाँ त कउनो नियम-क़ानून, बैंक भा सरकार के पहरा तक नईखे। इहाँ डीटी के खेल अइसन चलेला कि लोग के मति मार देवेला।मान लीं कउनो बिना सिर-पैर के डिजिटल सिक्का बा, जवना पर कउनो कुकुर (Dog) भा बिलाई के फोटो छपल बा। डीटी बस मोबाइल उठवले आ लिख देहले: “क्रिप्टो ही भविष्य बा, हम एकरा के चाँद पर ले जाइब!”बस, जे सिक्का काल्ह ले कउनो गदहो के दाम ना मिलत रहे, ओकर भाव रातेरात 2000% ऊपर भाग जाला। आम लोग सोचत रह जाला कि ई कवन ब्लॉकचेन तकनीक ह, आ डीटी के सिपहसालार लोग पहिले से खरीदल ओ ‘कुकुर वाला सिक्का’ के बेच के आम जनता के कंगाली के कगार पर छोड़ देवेला।
तुलसीदास जी कह के गइले बाड़ें—’सबहीं नचावत राम गुसाईं’—बाकिर आज के डिजिटल ज़माना में बज़ार के सब सिक्का आ शेयर के ‘डीटी गुसाईं’ अपन उंगली पर नचावत बाड़े। जे ओकरा नाच के ताल समझ गइल, उ मालामाल बा, आ जे सिर्फ तमाशा देखलस, उ बर्बाद बा।
काल्पनिक घटना: जहिया बज़ार में मचल रहे हाहाकार
आईं, कुछ अइसन दिनन के याद कइल जाव जहिया बज़ार के इतिहास बदल गइल रहे। नाम त कउनो असली नईखे, बाकिर बज़ार के लोग ई दर्द बखूबी समझेला:
घटना अ: ‘ब्लैक थर्सडे’ अउर एगो पोस्ट के मार
एह बेर बज़ार एकदम शांत रहे। अचानक दोपहर के 2 बजे डीटी के अकाउंट से पोस्ट भइल कि: “अमूक टेक कंपनी हमरा देश के जासूसी कर रहल बा, एकरा पर कड़ा प्रतिबंध लागी।”तीन मिनट के अंदर ओ कंपनी के मार्केट वैल्यू 50 अरब डॉलर घट गइल। लोग चिल्लात रह गइल कि ई अफ़वाह ह, बाकिर तब तक डीटी के दोस्त लोग सारा माल बेच के बज़ार से बाहर हो चुकल रहे। शाम के पता चलल कि कंपनी पर कउनो प्रतिबंध नईखे लागत, बाकिर कमाई करे वाला त कमा लिहले!
घटना ब: ‘ग्रीन मंडे’ अउर ‘फार्मा’ के चमत्कार
एक वाकया अउरी बा। कउनो बीमारी के दवाई बनावे वाली एगो छोटहन कंपनी रहे। डीटी एक दिन लिख देहनी: “ई दवाई चमत्कारी बा, एकरा से सब ठीक हो जाई।”ओ कंपनी के शेयर जेकर दाम 5 रुपया रहे, उ रातेरात 500 रुपया हो गइल। बाद में डॉक्टर लोग कहलस कि ई दवाई कउनो काम के नईखे, बाकिर ओकरा से का? डीटी के करीबियन के जेब त गरम हो ही चुकल रहे।
पाठकन खातिर काम लायक ‘व्यंग्यात्मक सलाह’ 😉
अब जदि रउआ ए बज़ार के दलदल में कूदल चाहत बानी, त कउनो अर्थशास्त्र के पोथी पढ़े के ज़रूरत नईखे। हमार ई चार गो कड़वा अउरी काम लायक मुफ़्त के सलाह गाँठ बाँध के रख लीं:
मोबाईल के घंटियन पर कान राखीं:
टीवी पर आवे वाले बज़ार के पंडितन के ज्ञान सुनल बंद करीं। उ लोग बस पुरान रोना रोवेला। रउआ बस डीटी के ‘ट्रुथ सोशल’ के नोटिफिकेशन ऑन राखीं। जइसहीं नोटिफिकेशन के घंटी बाजे, समझ लीं कि लक्ष्मी जी कउनो के घरे जा रहल बाड़ी भा कउनो के लूट के आ रहल बाड़ी।
भीड़ के पीछे मत भागीं:
जब पूरा दुनिया कउनो शेयर भा क्रिप्टो के खरीदे खातिर पागल होखे, तब समझ लीं कि डीटी के दोस्त लोग माल बेचे के तैयारी में बा। ‘FOMO’ (छूट जाए के डर) के चक्कर में पड़ के अपन गाढ़ी कमाई ओ कुकुर वाले सिक्का में मत लगा दीं।ओतने पैसा लगाईं जवना के डूबला पर रोवे के ना पड़े: बज़ार में निवेश करत घड़ी ई मान के चालीं कि रउआ कउनो जुआ के अड्डा पर बानी। जवन पैसा बिला गइला पर रउआ रात के नींद ना उड़े, बस ओतने पैसा ए जादुई बज़ार में झोंकीं।
‘स्टॉप लॉस’ के असली मंतर:
बज़ार के सबसे बड़ सत्य इहे बा कि जे आज राजा बा, उ काल्हु रंक हो सकेला। अपना लालच पर लगाम लगाईं। अगर थोड़ा मुनाफ़ा हो गइल बा, त ओकरा के जेब में रख के निकलल सीखीं, ना त डीटी के एगो पोस्ट पूरा मुनाफ़ा अउरी मूलधन दुनु सोख ली।
निष्कर्ष: जेकर लाठी, ओकर बज़ार
एह पोस्ट के सार इहे बा कि आज के बज़ार कउनो गणित भा अर्थशास्त्र से नईखे चलत। ई त बस एगो ‘पपेट शो’ (कटपुतली के खेल) बन गइल बा, जवना के डोरी डीटी के हाथ में बा। नियम, क़ानून, अउरी सेबी जइसन संस्था त बस तमाशा देखे खातिर बाड़ी।जब तक डीटी के हाथ में मोबाइल बा आ उहाँ के ‘ट्रुथ सोशल’ ज़िंदा बा, तब तक उनके क्रोनिक्स लोग के लॉटरी लागत रही आ आम आदमी बज़ार के चक्कर काटत-काटत थाक जाई। इहे आज के बज़ार के ‘कड़वा अउरी नंगा सच’ बा, भलहीं एकरा के रउआ काल्पनिक कहानी मान लीं!


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