Category: सतमेझरा

मूस के सीख आ शेर के तमेचा

– जयंती पांडेय ई जान जा भाई, मूस चाहे जवना पार्टी में होखो बाकिर सलाह दिहला से बाज ना आवे. ऊ अपने चाहे जवन करऽ सन बाकिर ई ना चहिहें सन कि लोगो ऊहे करो. अइसने एगो मूस जंगल में भाषण ना दे के सलाह दिहला के सरकारी मिशन पर...

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दोसरा के सतावल भक्ति ना हऽ

– जयंती पांडेय ओह दिन जब भगतजी मुअले, तऽ सबलोग कहऽल – भगतजी स्वर्गवासी हो गइले. पर अब मालूम भइल कि भगतजी, स्वर्गवासी ना, नरकवासी भइले हंऽ. हम कहब तऽ केहू मानी ना, पर इहे सही हऽ कि उनका नरक में डाल दिहल गइल बा आ उन पर...

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बड़ा कठिन बा जमाना के संगे चलल

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमा नंद के दुअरा पर सबेरहीं पहुंचले रामचेला. बाबा मालगोरू के नादे पर बान्ह के जब फुरसताह भइले तऽ रामचेला के लगे आ के बइठले. रामचेला पूछले कि बाबा हो! ई जमाना के साथ कइसे चलल जाउ. लोगवा कहऽ ता कि...

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शिक्षा के गारंटी-जय हो! जय हो!!

– जयंती पांडेय रामनिहोरा. ऊ गांव -जवार के बड़ा पुरान नेता हवें. कौ हाली तऽ परधानी जीत भइल बाड़े. एक दिन भिनसहरे बाबा लस्टमानंद के दुअरा पर अइले. बाबा बैलन के सानी पानी दे के गोबर- गोथार करत रहले. नेताजी दूरे से पुकरले, का...

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भउजी हो….

भउजी हो….. का बबुआ ? लालू आ मुलायम के शिकायत बा कि सरकार ओह लोग के तनखाह कमे काहे बढ़वलसि ह ? ओह लोग के कतनो तनखाह दे दिहल जाई कमे रही. आखिर मास्टरी करत करोड़पति देश के कई जने भइल बाड़न ? जे चपरासीओ लायक ना रहल से आजु...

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