इहवां गड़हा आ भ्रष्टाचार के कमी नइखे
– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद अपना मड़ई में शांति से बइठल रहले कि रामचेला आ धमकले. उनुका के देखते बाबा कहले, “हो ई दुपहरिया में केने चलल बाड़ऽ?” रामचेला कहले, “महँगू के धियवा के बिआह बा, चलऽ चार गो गाड़ी...
Read More– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद अपना मड़ई में शांति से बइठल रहले कि रामचेला आ धमकले. उनुका के देखते बाबा कहले, “हो ई दुपहरिया में केने चलल बाड़ऽ?” रामचेला कहले, “महँगू के धियवा के बिआह बा, चलऽ चार गो गाड़ी...
Read Moreभउजी हो ! का बबुआ ? सुनत बानी कि मनमोहन सिंह आ गिलानी में एगो बात एके लेखा बा. का बबुआ ? गिलानी के अपना देश में रहे वाला ओसामा का बारे में पता ना रहे आ मनमोहन के अपना मंत्री ए॰राजा का बारे में. ई झूठ बा बबुआ. काहे भउजी ? मनमोहन...
Read More– जयंती पांडेय घर के बूढ़ पुरनिया कहेलन कि सब दिन होत न एक समाना. तुलसिओ बाबा एतना बड़ रामचरितमानस लिख के समुझवले बाड़न, “होइहें वही जो राम रचि राखा, को करि तरक बढ़ावहीं शाखा.” सचहूँ, समय बहुते बलवान होला. एकर...
Read More– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद लमहर सांस घींच के कहले, हो राम चेला ई कुटिल, कपटी जुग में अबहियों कातना लोग भेंटाता ई कहे वाला कि “हम आजु ले कवनों भ्रष्टाचार नइखी कइले. नाजायज पइसा के हाथ से छुअल का हम त ओकरा इयोर तकबो...
Read More– जयंती पांडेय सियावर बाबू के मुँह पर बड़ा दिन का बाद हँसी लउकल. बाबा लस्टमानंद से ना खेपाइल. सियावर बाबू सरकारी अफसर हउवन. सरकारी कर्मचारी अउर आफिसन के बारे में सब कुछ जाने ले. एही से जब ऊ भेंटास त मुँह माहुर अस कइले रहस....
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