देश के संसाधनन पर पहिला हक भाजपा वोट बैंक के
- टीम अंजोरिया

देश के संसाधनन पर पहिला हक भाजपा वोट बैंक के

भाजपा महिला वर्ग के आपन बड़हन वोट बैँक का रूप में बदले के योजना बना रहल बिया। आ एह योजना का आहटे से विपक्ष में खलबली मच गइल बा।

देश के संसाधनन पर पहिला हक

एक जमाना में सोनिया के गुड्डा प्रधानमंत्री मनमोहन सिह के एह बयान से पूरा कुख्याति मिलल रहल कि देश के संसाधनन पर पहिला हक मुसलमानन के होला। मनमोहन सिंह के औकात ना रहल कि सोनिया गाँधी के बात का बहरी जा सकसु। से इहो सोनिये गाँधी के बयान माने के चाहीं।

सबले खास बात ई कि गाछ लगवलसि कांग्रेस बाकिर ओकर फल खाए के तरीका खोज निकललसि भाजपा। कांग्रेस आधार कार्ड लेके आइल आ ओकर अतना व्यापक उपयोग हो सकेला ई भाजपा कर देखवलसि। बैंकन के राष्ट्रीयकरण कांग्रेस कइलसि बाकिर ओकर असली उपयोग जनधन खाता खोलवा के भाजपा कर देखवलसि। पासपोर्ट नागरिकता के प्रमाणपत्र ना हवे एकर एलान इन्दिरे गाँधी का जमाना में क दीहल गइल रहल। बाकिर अब ओकर उपयोग करे जा रहल बिया भाजपा। अब उहे लोग जे कबो कहत रहे कि कागज नहीं देखाऐगें अब चिचिया चिचिया के पूछत बा कि भाई कवन कागज देखावे के पड़ी!

अतना भूमिका एह ले जरुरी रहुवे कि हम असल मुद्दा पर आए से पहिले ओकर नींव पुख्ता कर लीं। एक जमाना में जवना समूह भा समुदाय के कांग्रेस के वोट बैंक मानल जात रहुवे आ कहात रहुवे कि एह वोट बैंक का बिना कवनो सरकार बनिए ना सके। आ भाजपा एकरा के अतना पुख्ता तरीका से तय करा दिहलसि कि वोट बैंक के औकात नइखे जे ओकरा अश्वमेध के घोड़ा बान्ह लेव। भाजपा शायद अकेला राजनीतिक गोल बन के सामने आइल जवना के नीति बा कि एकहूं मुसलमान के संसद के टिकट नइखे देबे के। अल्पसंख्यक मंत्रालय अब असली अल्पसंख्यकन का हाथ में बावे।

नरेन्द्र मोदी के राजनीतिक इतिहास जाने वाला एह बात के मान लिहें कि कवनो दू गो चुनाव मोदी एकही मुद्दा पर नइखन लड़ले। आखिरी समय ले विपक्ष के बुझइबे ना करे कि अबकि के चुनाव कवना मुद्दा पर लड़े के बा। अगिला चुनाव भाजपा अपना वोट बैंक का सहारे लड़ल चाहत बिया आ ओकर सबले बड़ वोट बैंक हवे महिला। केन्द्र सरकार आजु एगो रिपोर्ट जारी क के बतवले बिया कि देश में गृहिणियन के वेतन जोड़ल जाव त करीब 22 लाख करोड़ के होखी।

गृहिणियन के काम के मोल

अपना देश में गृहिणियन के काम के कवनो मोल ना दीहल जाव जबकि ऊ लोग जवन करेला तवना के मोल लगावले ना जा सके। ई लोग बिना कवनो वेतन घर के सगरी काम करेली आ परिवार के सुख दुख के पूरा धेयान राखेली। अगर ऊ महिला कामकाजी होखे, माने कहीं कवनो बिजनेस भा नौकरी करत होखो त ओकरा काम के बोझ दुगुना हो जाला।

केन्द्र सरकार अब गृहिणियन के वेतन डायरेक्द बेनेफिट ट्रांसफर का तरह करे के सोच रहल बिया। इहो चरचा बा कि घर के मरद के जवन आमदनी होखी तवना के कम से कम पचीस प्रतिशत हिस्सा गृहिणी के दीहल अनिवार्य कइल जा सकेला। आयकर गणना खातिर ई हिस्सा ओह आदमी के आमदनी से घटा दीहल जाई आ औरतन के मिले वाला हिस्सा आयकर मुक्त राखल जाई। महिला के मिले वाला एह वेतन के उपयोग ऊ महिला घर के काम ना कर के अपना व्यक्तिगत जरुरतन ला करी आ घर के खरचा पहिले का तरह आदमी का आमदनी से चलावल जात रही। अगर कवनो आदमी गृहकार्य में सहयोग करेला आ एकर प्रमाण शपथ पत्र का रुप में ऊ अपना पत्नी से ले के जमा करवा सके त ओकरा कुछ कम देबे के अनुमति मिल जाई बाकिर आयकर गणना का चलते बेहतर इहे रही कि ऊ पूरा चौथाई हिस्सा अपना पत्नी भा महतारी के (अगर ऊ अविवाहित होखे आ घर माई देखत होखस।) सँउप देव।

मोदी सरकार के सपना

मोदी सरकार के सपना बा कि देश के महिला आत्मनिर्भर हो जा सँ। अगिला चुनाव से पहिला जनप्रतिनिधियन का चुनाव में पचास प्रतिशत आरक्षण महिला वर्ग के मिलल तय बा। ऊपर से अगर हर महिला के वेतन का रूप में डायरेक्ट बेनेफिट मिले लागो जइसे अबहीं देश के किसानन के दीहल जा रहल बा त ई एगो क्रांतिकारी कदम होखी। गृहिणियन के आर्थिक आत्मनिर्भरता से लैंगिक समानता बने लागी आ महिला के ताकत आ सम्मान दुनू बढ़ जाई। भाजपा के मिले वाला वोट में जवन वृद्धि होखी तवन सोना में सुगंध का तरह होखी। संविधानो के भावना बा कि नागरिकन के आर्थिक न्याय आ समान अवसर मिले के परिस्थिति बनावल जाव। महिला वर्ग के आर्थिक ताकत देशो के अर्थव्यवस्था ला बहुते उपयोगी होखी।

एह तरह के संभावना के सोचिए के विपक्ष में खुसुर फुसुर शुरु हो गइल बा। विपक्ष एह तरह के चुनावी रेवड़ी के पूरजोर विरोध करे के योजना बनावे में लाग गइल बावे। सड़क से न्यायालय तक हर मोर्चा पर एकर विरोध करे जात बावे विपक्ष। विपक्ष के कहना बा कि एहसे देश के अर्थव्यवस्थो चौपट होखे के अनेसा बन जाई। विपक्ष इहो कहत बा कि एह से परिवार व्यवस्था टूटे के अनेसा बन जाई काहे कि जवन सेवा भावनात्मक लगाव का चलते महिला करेली ओकरा के मजदूरी के रूप दीहल जा रहल बा।

अब देश के पुरुष वर्ग के इहे माँग होखे के चाहीं कि गृहिणियन के वेतन सरकार का तरफ से दीहल जाव आ पुरुष के आमदनी के चौथाई हिस्सा पत्नी भा महतारी के दीहल अनिवार्य कर दीहल जाव आयकर छूट का साथे। एहसे परिवार के असल आमदनी बढ़ जाई आ आयकर से राहतो मिल जाई। केन्द्र सरकार एह योजना के “गृहिणी सम्मान निधि” भा “घरेलू श्रम भत्ता” के नाम दे सकेले आ ई पैसा सीधे महिला के बैंक खाता (DBT) में जाई, ताकि कवनो बिचौलिया एकरा के हड़प न सकी।

जय जय मोदी ! हर हर मोदी! घर घर मोदी !

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