अब का लदबऽ ए बएपारी, अब त गोन भइले भारी
- डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल

सोस्ती सिरी पत्री लिखी पटना से-46

आइल भोजपुरिया चिट्ठी

अब का लदबऽ ए बएपारी, अब त गोन भइले भारी

रसमनिया अपना तीनि बरिस के लइका का पीठि पर भारी बस्ता का सङे-सङे ओकरा कान्ही पर पानी वाला बोतल टाङत रहे आ लइका रोवत जात रहे। काकी का मुँह से निकलि गइल- अब का लदबऽ ए बएपारी, अब त गोन भइले भारी। (गोन शब्द संस्कृत से आइल बा जवना के मतलब होला – अनाज आदि भरे के बोरा भा थैला, नाव खींचे के रस्सी, सहायक, बुजुर्ग) रसमनिया के मुँह बनि गइल आ ऊ भनभनात आगे बढ़ि गइलि। एही में लभेरन आ गइले। काकी ऊहे टॉपिक छेड़ि दिहली- “तीनि बरिस के लइका के उमिरि पढ़े के होला लभेरन?” लभेरन कहले कि कवनो सस्ता प्राइवेट स्कूल में नाँव लिखवले होई, जवन आउटडेटेड होई। फेरु त ऊ प्री-स्कूल के बड़ाई करे लगले।

लभेरन का आदर्श भाषण पर काकी झनकि के बोलली- त प्री-स्कूल स्कूल ना हटे? ओहिजा गइला से लइकन के बचपन ना छिनाई? पहिलहूँ त नर्सरी ओगैरह में पढ़ाई होत रहे, एहमें नया बात का बा?

लभेरन कहले- राउर ई कहल गलत नइखे, रउआँ ठीके सोचतानी काकी, बाकिर प्राइवेट स्कूलन में चलेवाला नर्सरी, एलकेजी, यूकेजी नियन क्लास आ ‘प्री-स्कूल’ का क्लास में जमीन आसमान के अंतर बाटे। ‘प्री-स्कूल’ भा ‘प्ले-स्कूल’ शब्द सुनलो पर दिमाग में ऊहे पुरनका स्कूल, भारी भरकम बस्ता, होमवर्क अउर इम्तहान के डर सामने आवे लागत बा। बाकिर, साँच त ई बा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का तहत जवन ‘प्री-स्कूल’ भा ‘बालवाटिका’ आजु चर्चा में बा, ऊ पुरनका सोच वाला नर्सरी स्कूलन से बेलकुल अलग बाटे। पहिले नर्सरी, एलकेजी आ यूकेजी में तीन-चार साल के बच्चन का हाथ में कठपिंसिन थमा दिहल जात रहे। फेरु त शुरू हो जात रहे बरियारी उहनी के एबीसीडी आ 1, 2, 3 लिखवावे के, रटे के आ इम्तहान लेबे वाला पढ़ाई। ऊ स्कूल से कम थोड़े रहे, लइकन के बचपन छीने में सबसे आगे रहे।

जवन नवका नीति शुरू भइल बिया, ओहमें तीन से छव साल का बच्चन खातिर “नो बुक्स, नो एग्जाम” के नियम बाटे, माने कवनो किताब ना, कवनो परीक्षा ना। एह तरह से प्री-स्कूल अब पढ़ाई के अड्डा नइखे रहि गइल, ई खेले के आ सामाजिक बनावे के केंद्र हो गइल बा।

अब काकी के किरोध तनी कम भइल आ जिज्ञासा बढ़े लागल। ऊ कहली- “तनी विस्तार में बतावऽ कि प्री-स्कूल में का होला। अइसन कइसे हो सकत बा कि लइका स्कूल जइहें स आ उहनी का दिमाग पर कवनो भारे ना परी?”

लभेरन बतावे शुरू कइले।

प्री-स्कूल के स्कूल खाली एही से कहल जाला कि ई एगो सुरक्षित परिसर होला, एकरा भीतर जवन कुछ कइल-करावल जाला, ऊ स्कूल से बेलकुल अलग होला। एकरा के ECE (Early Childhood Education) कहल जाला। एकरा में लइका माटी के खेलवना बनावेले सन, ब्लॉक जोरेले सन अउर तरह-तरह का रंगन से खेलेले सन। एकरा के खेल-आधारित शिक्षा (Play-based) कहल जाला।”

काकी बीचे में टोकली- ‘ब्लॉक जोरल’ का कहाला?

लभेरन बतवले-
“एह स्कूल में लइका अपना मन से प्लास्टिक भा लकड़ी का छोट-मोट रंग-बिरंगी टुकड़न के एक-दोसरा का ऊपर भा आपस में फँसाके अपना मर्जी से घर, गाड़ी, मीनार भा कवनो किसिम के आकृति बनावेले सन। एकरे के ब्लॉक जोरल कहल जाला। प्री-स्कूल में लइकन के एह तरह के खेलवना दिहला का पाछा वैज्ञानिक अउर शैक्षणिक कारण बाड़े सन। एहसे उहनी के आङुरि मजबूत होली सन अउर कठपिंसिन धरे लाएक आ सुन्नर लिखे लाएक बनि जाली सन। शारीरिक विकास का सङहीं उहनी के सोचे के आ तर्क करे के क्षमता बढ़ेले। अतने ना, ऊ बिना किताब पढ़लहीं खेलते खा विज्ञान आ गणित के नियम सीख जाले सन। कवन बड़ बा, कवन छोट, कवन लाम बा कवन चौकोर आ कवन गोल- ई कुल्हि शेप आ साइज त उहनी का खेले खेल में सीखि जाले सन। एही तरह से ऊ संतुलन बनावलो जानि जाले सन, जब मीनार बनावेले सन त। कतना ऊँचाई होखेके चाहीं एकर बोध त उहनी के होइए नु जाला। जब ऊ कहेले सन कि हम आपन घर बनावे में छव गो लाल आ चारि गो हरियर ब्लॉक जोरलीं हा, त ई मानि के चलीं कि खेलते खेलत में ऊ गिनतियो सीखि गइले सन। अब देखीं एकही ब्लॉक का डिब्बा से एगो बच्चा हवाई जहाज बनावेला त दोसरका सुन्नर महल। केहूँ पर कवनो दबाव ना होला। सभ के कल्पना के उड़ान अलग होले आ एही में ओकरा रचनात्मकता के विकासो होखेला।”

लभेरन का अतना सफाई से समुझवला प काकी बहुत खुश भइली आ कहली कि अब प्री-स्कूल के आगेवाला काम बतावऽ। लभेरन बतवले कि प्री-स्कूल में गपशप, कहानी आ कविता सुनल-सुनावल, गाना गावल आ नचला-कुदला नियन गतिविधि-आधारित कामो बच्चा मन लगाके करेले सन। एकर कवनो इम्तहान ना होला। अब बताईं कि ई स्कूल घरो से नीमन बा कि ना? एकरा से लइकन के बचपन पर कवनो खराब असर परी का?

काकी स्कूल का नाँव आ सरकार का काम पर पहिल बार बहुत खुश लउकली। कहली- “चलऽ खेल-कूद के जगहि नाहिंयो रहला पर लइकन के अब खेले-कूदे के खूब मिली आ बिना दबाव के पढ़ाइयो हो जाई।”

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संपर्क : डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल, निकट- पिपरा प्राइमरी गवर्नमेंट स्कूल, देवनगर, पोल नं. 28</e
पो. – मनोहरपुर कछुआरा, पटना-800030

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