आस्था के अरथी के चउथका ढोवनहार के?
- टीम अंजोरिया

आस्था के अरथी के चउथका ढोवनहार के?

अयोध्या धाम के भगवान श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर पर चढ़ल चढ़ावा आ दान में भइल घपलेबाजी अब सभका जुबान पर बा आ एह चोरन पर थुकत लोग थाकत नइखे। आ अइसने एगो वारदात पर सुनल एगो पुरान कहानी आजु दोहरावल चाहत बानी। ई कहानी एकाध बेर पहिलहूं सुना चुकल बानी आजु फेर सही। काहे कि एकरा के रेघरियावल बहुते जरुरी बा।

Image by Gemini about a counting process and its observers

पुरान कहानी

एगो गाँव में चोरी के वारदात में शामिल तीन गो चोर पकड़इले सँ आ ओहनी के राजदरबार में पेश कइल गइल न्याय खातिर। राजशाही के जमाना रहल से राजा न्याय करे के अधिकारी रहते रहलन आ ओह लोग के फैसला पर कवनो सवाल अमूमन ना उठावल जात रहुवे। राजा तीनो चोरन के आपराधिक आ पारिवारिक-सामाजिक इतिहास के जानकारी लिहलन आ सजा सुनावल शुरु कर दिहलन –

पहिलका के सजा सुनवलन कि एकर माथ छील के मुँह पर करिखा पोत के गदहा पर बइठा के लात जूता मारत एकरा सगरी गाँव में घुमावल जाव।
दोसरका के सजा दिहलन कि एकरा के गाँव का चौबारा पर कोड़ा मार के छोड़ दीहल जाव।
तिसरका के सजा सुनावत राजा तनी हिचकलन। बाकिर सजा त सुनावहीं के रहल। सजा का बदले ओकरा के बस अतने कहलन – धत तेरे की, एह नीच काम में तुहूं शामिल रहलऽ। जा आगे से सुधरे के कोशिश करीहऽ।

कहानी में हम तीन गो चोर के बात कइले बानी बाकिर एकरा के तीन तरह के चोर का रूप में लीहल जाव। दरबार में सन्नाटा छा गइल। आखिर एगो दरबारी हिम्मत कर के पूछलसि – हे राजन! एकही अपराध खातिर तीन तरह के सजा काहे सुनावल गइल? तिसरका के त रउरा कवनो सजाये ना दिहनी।

राजा कहलन- कि ओकरा के हम एहसे कड़ा सजा देइये ना सकत रहीं।

दरबार से कवनो सवाल ना उठे के रहल ना उठल। बाकिर आगे जवन भइल तवना के कहानी सुन लीं। —
पहिलका चोर के जब घुमावल जात रहुवे आ ऊ जब अपना घर का सोझा से गुजरल त अपना मेहरारू के आवाज दे के कहलसि – रे खाना परोस के राख। अब दूइए चार घर बाचल बा!
दुसरका चोर कोड़ा से पिटइला का बाद गाँव छोड़ के चल गइल।
बाकिर तिसरका ? ऊ राते में फँसरी लगा के जान दे दिहले रहल।

त अयोध्यो वाला मामिला में कुछ अइसने होखे के संभावना बा। चूंकि जवन होखे जात बा तवन नीमने रहे के चाहीं से हम अनेसा ना कहि के संभावना के बात करत बानी।

मामिला के जाँच करे वाला विशेष जाँच दल आपन रपट पेश कर चुकल बा आ ओकरा बाद प्राथमिकी दर्ज करि के आठ गो अपराधियन के गिरफ्तारी के खबर सुने में आवऽता। बतावल जात बा कि कुछ अउरो गिरफ्तारी होखबे करी काहें कि योगी बाबा के साफ संदेश बा कि केहू के बखसल ना जाई।

आठ जने के गिरफ्तारी

जवन आठ जने के गिरफ्तारी भइल बा तवना में चंपत राय के आदमी, अनिल मिश्रा के रिश्तेदार, आ गोपाल राव के चेला चपाटी शामिल बाड़े सँ। टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, सुभाष श्रीवास्तव, करुणेश पांडेय, आ रामशंकर मिश्रा के गिरफ्तार कर लिहल गइल बा। एहनी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) अउर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत बहुते कड़ा धारा लगावल गइल बा जवना चलते एहनी के उमिर कैद तक हो सकेला। खास कर के अमानत में खयानत वाली धारा 316(5) जवना में उमिरकैद तक के प्रावधान बा।

बाकिर गिरफ्तारी एहनिये ले नइखे रुके वाला। अब सवाल बा कि ऊपर वाली कहानी के तिसरका तरह के चोर का तरह चंपत राय, अनिल मिश्रा, आ गोपाल राव का बारे में का होखे जा रहल बा? एहनी के जवन होखे बाकिर ई तीनो साबित कर दिहले बाड़ें कि एहनी का लगे कवनो नैतिकता नइखे। ईज्जतदार आदमी रहते सँ त अबले बिना कवनो अगर-मगर लगवले अपना पद से इस्तीफा दे दिहले रहतन स!

आस्था के अरथी के चउथका ढोवनहार के?

अब एक बेर फेरु से एह लेख के मथैला देखल जाव। आस्था के अरथी के चउथका ढोवनहार के? एह सवाल के जबाब में हो सकेला कि कुछ लोग नृपेन्द्र मिश्रा के नाम ले लेव। बाकिर हमरा लागत बा कि ओहू ले कवनो बड़ कारीगर एह मामिला में शामिल रहल बा जे एह तीनो पर भारी रहुवे। ओह चउथका का बारे में जबले साफ नइखे हो जात तबले अनेसा बनले रही कि सरकार मामिला में लीपापोती कर रहल बिया। लगुआ भगुआ सभ के गिरफ्तार करि के बड़का चोरन के बचावल जा रहल बा। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के कहना बा कि एसआईटी खाली ‘छोटकी मछरियन’ के फंसावत बिया आ बड़का लोगन के बचावे खातिर सबूत मिटावल जा रहा बा। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय केकहना बा कि बस जनता के भटकावल जा रहल बा जेहसे ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय जइसन बड़ अधिकारी लोगन के बचावल जा सके। आआपा के आजीवन संयोजक अरविन्द केजरीवाल के कहना बा कि ‘मामला रफा-दफा’ करे वाला खेल खेलल जा रहल बा जवना से रसूखदार लोगन पर आंच ना आ पावे।

एक बात त तय बा कि एह मामिला के अन्त कइसे हो रहल बा ओह पर योगी आदित्यनाथ, केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह, पीएम नरेन्द्र मोदी, विश्व हिन्दू परिषद, आ राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के अग्नि परीक्षा होखे जा रहल बा। अगर चंपत, अनिल, गोविन्द साफ बच निकलिहें त रामभक्त एह लोगन के कबो माफ ना करीहें। हो सकेला कि जइसे सिख नरसंहार के दोषी कांग्रेस के अबहियों सिख समुदाय के वोट मिलत बा वइसहीं रामभक्तनो के वोट मिल जाव बाकिर इज्जत ना मिली फेर।

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