भाषा से संस्कार बनेला आ संस्कार से भाषा
- टीम अंजोरिया

भाषा से संस्कार बनेला आ संस्कार से भाषा

language and culture are interdependent

 

पिछला लेख के समीक्षा करत चैट जीपीटी के सलाह रहल कि आगे खातिर –

भोजपुरी वर्तनी के एकरूपता बनवले रखीं (जइसे अबले/अबले, उनुका/ओकरा, वइसन/ओइसन में एक शैली चुन लीं)।

आजु एह लेख में अब एही पर आपन बात राखे जात बानी।

भाषा से संस्कार बनेला आ संस्कार से भाषा। अंंगरेजी में रउरा खातिर you, तोहरा खातिर you, आ तें खातिरो you के इस्तेमाल होला। you खातिर हिन्दी में आप आ तुम दू गो शब्द बाड़ी सँ आ भोजपुरी में तीन गो – रउरा, तूं, आ तें। एहिजा तें शब्द बढ़ जाला हिन्दी से एक डेग आगे। अगर सामने वाला के आदर से बोले के बा त रउऱा, बराबरी का स्तर से बोले के बा त तूं, आ हिकारत भा नाराजगी का नजर से बोले के बा त तें के इस्तेमाल होखेला। एही चलते उनुका आ ओकरा में से एगो के नइखे चुनल जा सकत। जब उहाँ खातिर कुछ कहे बा त उनुका कहहीं के पड़ी आ जब ‘उस’ खातिर कहे के होखी त ओकरा कहहीं के पड़ी। एह दुनू के जगह तय बा। एक का जगहा दोसरा के इस्तेमाल कइला से बात बिगड़े के पूरा संभावना रही।

जानत बानी कि चैट जीपीटी भा गूगल असिस्टेन्ट का लगे संदर्भ सामग्री के कमी नइखे बाकिर साँच कहीं त एह लोगन से बतियावे में आनन्द आवेला। ई लोग जवना तरह से हमरा सवालन के जबाब देला तवन मन प्रसन्न कर देला। जवन जानल चाहीं तुरते बता दीहें, जइसन फोटो बनवावे के बा तइसन फोटो बना दीहें लोग। हमरा गलती के बताइओ दीहें लोग आ ओकरा में सुधार करे के सलाहो दे दीहें लोग। पहिले हम सीधे टाइप करत रहीं आ डाल देत रहीं अंजोरिया पर। दुनिया के पहिलका भोजपुरी वेबसाइट होखला का चलते हमरा लगे कवनो दोसर मपना ना रहल। भोजपुरी के मानक तय नइखे। तीन कोस पर पानी बदले पाँच कोस पर बानी। भोजपुरी के इलाका अतना बड़हन बा कि एक जगहा के बोली दोसरा जगहा के लोग के अनसा देबेला। आ हमार शिक्षा दीक्षा भाषा विज्ञान से जुड़ल ना रहल। इंटरमीडियेट का बाद कबो भाषा से संपर्क ना भइल। एहसे व्याकरण पर कवनो अधिकार ना बना पवनीं। जवने सिखनी भोजपुरी के बड़का लिखनिहारन के रचना से सिखनी आ एह सलाह से कि – भोजपुरी वर्तनी में जवने बोलीं तवने लिखी के नियम राखे के चाहीं।

पता ना वस्तुस्थिति का बा बाकिर हमरा ई गलतफहमी हो जाला कि शायद आर्टिफिशयल इंटेलिजेन्स से केहू अझूराव ना। बाकिर हमरा आनन्द आवे लागल बा एह लोग से विमर्श कर के। ई लोग जवन कहेला भा बतावेला तवना में हमार भला छिपल होला, उनुकर गुुरुत्व ना। एह लोग से चरचा कर के हमरा अपना लिखे में सहायता मिले लागल बा, सही बेखौफ प्रतिक्रिया मिले लागल बा। आ एह प्रतिक्रिया से हमार लिखलका अउरी बेहतर हो रहल बा। एह ला एह लोग के अभिनन्दन करत बानी।

असल में भोजपुरी के समस्या ई बा कि एकर अधिकतर का, सगरी लिखनिहार हिन्दी पृष्ठभूमि के होलें। हिन्दी के व्याकरण आ मानक से एने ओने होखल एह लोग के नीक ना लागे। कुछ प्रतिष्ठित लिखनिहारन से हमार विमर्श कई बेर ‘भी’ आ ‘ही’ के प्रयोग पर होखत रहेला आ आजु ले ना त हम मनलीं ना उहाँ के। दुनू आदमी अपना अपना बात पर टिकल बानी सँ। आर्टिफिशियल इंटेलिजेन्स उनुको के सही बता देला, हमरो के।

हिन्दी के स्वर का तुलना में भोजपुरी के स्वर अधिका बाड़ी सँ आ एहू चलते, भा कहीं त एही चलते, भोजपुरी पढ़ल बहुत दुरुह हो जाला अधिकतर हिन्दी पाठक-पाठिकन ला। बाकिर एकर समाधान एहमें ना खोजल जाए के चाहीं कि हमनी का हिन्दी वाला सिद्धान्तन के मान लीं। जब हिन्दी स्वयं संस्कृत के नियम ना माने त भोजपुरी काहे मानी हिन्दी के नियम! संस्कृत में संज्ञा के आठे गो ना चौबीस गो हो जाला। हिन्दी में ओकरा खातिर, (कई बेर हमहूं उहापोह में पड़ जानी कि खातिर लिखीं कि ला से काम चला लीं?) विभक्ति बना लीहल गइल बा। भोजपुरी के एहसे कवनो उरेज ना होला कि संज्ञा रूप बिगाड़ल मत जाव। ‘नरेन्द्र मोदी का भी कहना है’ का जगहा ‘नरेन्द्रो मोदी के कहना ह’ भा ‘नरेन्द्र मोदीओ के कहना ह’ लिखे में सकुचाला ना आदमी।

हमरा विचार से भोजपुरी के भोजपुरिये रहे दीहल जाव हिन्दी के भोजपुरिया के भोजपुरी लिखे बोले के आदत में सुधार ले आवल जाय।

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चैट जीपीटी से मिलल समीक्षा –

ई लेख पढ़ के लागल कि ई खाली भाषा पर टिप्पणी ना ह, बलुक भोजपुरी के स्वभाव, मानकीकरण आ कृत्रिम बुद्धिमत्ता के साथे लेखक के अनुभव—तीनू के जोड़त एगो आत्मकथ्य बन गइल बा। तर्क साफ बा आ शैली सहज बा। कुछ जगहा भाषा कसला आ प्रवाह बढ़ावे खातिर सुझाव देत बानी।

जवन बात सबसे मजबूत लागल
रउरा “रउरा–तूं–तें” वाला उदाहरण देके ई बढ़िया साबित कइनी कि भोजपुरी में सर्वनाम खाली व्याकरण के चीज ना ह, संस्कार आ सामाजिक संबंध के अभिव्यक्ति ह। एह तर्क से “उनुका” आ “ओकरा” के एकही मानकीकरण में बाँधे के सलाह के उचित जवाब मिलेला।
एआई के लेके रउरा नजरिया संतुलित बा। ना अंध प्रशंसा, ना अंध विरोध। ई बात पाठक के भरोसा देला।
आखिरी निष्कर्ष—”भोजपुरी के भोजपुरिये रहे दीहल जाव”—पूरा लेख के सार बन के उभरत बा।
जवन जगहा थोड़ा कसल जा सकेला

1. शुरुआते के वाक्य

“भाषा से संस्कार बनेला आ संस्कार से भाषा।”

बहुत बढ़िया शुरुआत बा। एहिजा “अंंगरेजी” के “अंगरेजी” कर दीं।

2. एह वाक्य में दोहराव बा

जब उहाँ खातिर कुछ कहे बा त उनुका कहहीं के पड़ी आ जब ‘उस’ खातिर कहे के होखी त ओकरा कहहीं के पड़ी।

एहके एह तरह कसल जा सकेला—

जब आदर के संदर्भ होखी त ‘उनुका’ कहहीं के पड़ी, आ साधारण संदर्भ में ‘ओकरा’। दुनू के आपन-आपन जगह बा।

3. एआई वाला पैराग्राफ

जवन जानल चाहीं तुरते बता दीहें…

एहमें “लोग” शब्द लगातार कई बेर आ गइल बा—

जवन जानल चाहीं, तुरते बता दीहें। जइसन फोटो बनवावे के बा, तइसने फोटो बना दीहें। गलती बताइओ दीहें आ ओकरा में सुधार करे के सलाहो दे दीहें।

एहसे लय बढ़ जाई।

4. ई वाक्य थोड़ा भारी लागेला

भोजपुरी के मानक तय नइखे। तीन कोस पर पानी बदले पाँच कोस पर बानी।

अगर मुहावरा पूरा लिख दीं त प्रभाव बढ़ी—

भोजपुरी के मानक आजुओ तय नइखे। तीन कोस पर पानी बदलेला, पाँच कोस पर बानी।

5. एह वाक्य में “गलतफहमी” शब्द थोड़ा नकारात्मक लागत बा

हमरा ई गलतफहमी हो जाला कि शायद आर्टिफिशयल इंटेलिजेन्स से केहू अझूराव ना।

एहिजा “धारणा” अधिक उचित लागेला—

हमरा त कई बेर लागेला कि शायद आर्टिफिशियल इंटेलिजेन्स से केहू अझूरावे मुश्किल बा।

6. “उनुको के सही बता देला, हमरो के।”

ई बात रोचक बा, बाकिर अउरी पैना हो सकेला—

आर्टिफिशियल इंटेलिजेन्स के खासियत ई बा कि ऊ संदर्भ के हिसाब से कई बेर उहाँ के तर्को के सही बतावेला आ हमरो के।

7. अंत वाला पैराग्राफ

ई लेख के सबसे मजबूत निष्कर्ष ह। खाली आखिरी वाक्य थोड़ा अउरी धारदार हो सकेला—

मौजूदा—

हमरा विचार से भोजपुरी के भोजपुरिये रहे दीहल जाव हिन्दी के भोजपुरिया के भोजपुरी लिखे बोले के आदत में सुधार ले आवल जाय।

सुझाव—

हमरा विचार से भोजपुरी के भोजपुरिये रहे दीहल जाव। जरूरत भोजपुरी के हिन्दी बनावे के नइखे, बल्कि हिन्दी पृष्ठभूमि वाला लोग के भोजपुरी के स्वभाव समझे आ ओह हिसाब से लिखे-बोले के आदत डलावे के बा।

एगो बात जे विशेष रूप से कहे लायक बा

पिछला बेर हम “वर्तनी के एकरूपता” के सामान्य सिद्धांत बतवले रहीं। एह लेख में रउरा जवन प्रतिवाद कइनी—कि “उनुका” आ “ओकरा” शैलीगत विकल्प ना, बल्कि अर्थ आ सम्मान के स्तर बतावे वाला अलग-अलग रूप बाड़ें—ऊ बिल्कुल उचित बा। एहिजा एकरूपता लागू करे के कोशिश भाषा के अर्थे बिगाड़ दी। एह तर्क के रउरा बढ़िया ढंग से रखले बानी।

हाँ, एकरूपता के सलाह अबहियो बाकी जगह लागू हो सकेला—जइसे “आजु/आज”, “अबले/अब ले”, “भोजपुरिये/भोजपुरिया” (जहाँ अर्थ एके होखे), “तइसन/ओइसन” जइसन शुद्ध शैलीगत विकल्पन में। बाकिर जहाँ शब्द अर्थ, सम्मान भा संबोधन बदल देत होखे, उहाँ एकरूपता थोपल ठीक ना होई।

कुल मिला के ई लेख पिछला बतंगड़ से बेसी परिपक्व लागल। एहमें विचारो बा, अनुभवो बा आ भाषा के पक्ष में एगो संतुलित दलीलो बा। हमरा हिसाब से प्रकाशित करे लायक रूप में लगभग तैयार बा।

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आपन बात –

चैट जीपीटी से मिलल समीक्षा आ आपन लेख जस के तस बिना कवनो सुधार के अंजोर करत बानी। एकरा पीछे के सबले बड़का कारण बा कि हम चाहत बानी कि रउरो सभे एह तरह के विमर्श में शामिल होखीं। एहसे भोजपुरी अउरी पोढ़ होखी, परंपरा आ आधुनिकता के एगो नीक फ्यूजन बने के संभावना बने लागी आ शायद भोजपुरी के नवही लिखनिहारन के उत्साह बढ़ जाई कि उहो लोग एह तरह के सुविधा के लाभ उठावे अपना लेखनी ला।

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