केकर केकर लींही नाम, कमरी ओढ़ले सगरी गाँव
It is not only one person who bathes in the witch’s water
बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले। बजलऽ ए शंख बाकिर बाबाजी के पदा के! एह लेख के मथैला खातिर तीनो पर विचार कइनी त सबले सही लागल – केकर लींही नाम, कमरी ओढ़ले सगरी गाँव।

राबड़ी देवी के बंगला खाली हो गइल
आजु बिहार के मुख्यमंत्री रहल, पहिले मुख्यमंत्री रहल लालू प्रसाद के पत्नी, पहिले उप मुख्यमंत्री रहल आ उनुके बयान मुताबिक ‘चपरासी क्वाटर में जनमल’ तेजस्वी के महतारी राबड़ी देवी आजु बियफे का दिने आपन पुरनका सरकारी बंगला खाली कर के नयका आवंटित सरकारी बंगला में ना जा के कौटिल्य नगर स्थिर अपना निजी बंगला में चल गइली। समझ में नइखे आवत कि जब जाहीं के रहुवे त अतना डरामा कइला के जरुरत का रहुवे ?
लालू प्रसाद आ राबड़ी देवी के परिवार एह बंगला में बीसन बरीस से रहत रहुवे लोग। स्वाभाविक बा कि शहर के एगो मजगर जगहा पर मौजूद एह बंगला के छोड़े में पुरनका दिनन के इयाद आड़े आवत रहुवे।
अब एह चरचा में गइला बिना कि राबड़ी देवी काहे ना छोड़त रहली एह सरकारी आवास के मोह जवन मुख्यमंत्री आवास का सामने आ राजभवन – अब लोकभवन – का नियरा रहुवे। रसरी जर गइल होखो बाकिर ओकर ऐंठन जस के तस लउके वाला भरम बनल रह सकत रहुवे।
एही विवाद पर बोलत तेजस्वी कहलन कि उनुकर जनम चपरासी क्वाटर में भइल रहुवे आ ऊ लोग अबहियों दू कोठरी के क्वाटर में रह सकेला। तेजस्वी अगर इहो बता देतन कि कवन काम करि के चपरासी बंगला में रहे वाला परिवार आजु खरबों में खेलत बा त नवहियन के कमाई के कवनो राह लउक सकत रहुवे।
बाकिर आजु हम एहू पर नइखीं लिखे जात। हम एह सरकारी आवासन के गड़बड़झाला पर लिखे चलल बानी।
सरकारी आवास अधिकारियन का अलावे जन प्रतिनिधियनो के मिलेला। जइसन पद तइसन बंगला। मुख्यमंत्री ला अलग, उप मुख्य मंत्री ला अलग, नेता प्रतिपक्ष विधान सभा ला अलग, नेता प्रतिपक्ष विधान परिषद ला अलग, विधायक ला अलग, सांसद ला अलग वगैरह वगैरह। गनीमत बा कि जन प्रतिनिधि लोग ई कानून नईखे बनवा दिहले कि हर विधायकी आ सासदी ला अलग अलग बंगला मिले के चाहीं, आ हमेशा ला बनल रहे के चाहीं। जइसे कि हर विधायकी आ सांसदी ला पेंशन भत्ता हमेशा मिलत रहेला।
अबहीं राबड़ी देवी के बंगला का अलावा तेजप्रताप आ तेजस्वी के अलग अलग बंगला विधिसम्मत तरीका से मिलल रहुवे।
अब चलीं बाकी परिवारनो के चरचा कर लीहल जाव।
नीतीश कुमार परिवार
पूर्व मुख्यमंत्री होखला का चलते नीतीश कुमार के सरकारी आवास मिलल बा। उनुकर बेटा में निशांत कुमार के नया सरकारी आवास 5 देशरत्न मार्ग में दीहल गइल बा।
पासवान परिवार
रामविलास पासवान के दौर से लेके चिराग पासवान आ परिवार के अलग-अलग सदस्य सरकारी आवास के उपयोग करत रहलें। सांसद, केंद्रीय मंत्री आ दल प्रमुख होखे के आधार पर अलग-अलग सरकारी आवास मिलत रहल बा।
कुशवाहा, मांझी, सिन्हा, चौधरी परिवार
जीतनराम मांझी, उपेंद्र कुशवाहा, सम्राट चौधरी, सुशील मोदी जइसन नेता लोगो मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री, सांसद, विधान परिषद सदस्य या विपक्ष के नेता रहला के कारण समय-समय पर सरकारी आवास पावत रहलें। एहमें नियम के तहत आवंटन होला, बाकिर विवाद ओह घरी उठेला जब कार्यकाल खतम होखे के बादो आवास खाली करे में देरी होखे।
असली समस्या व्यक्ति ना, व्यवस्था बा
एह बहस के ईमानदारी से देखल जाए त समस्या खाली राबड़ी देवी, लालू यादव, नीतीश कुमार, चिराग पासवान या दोसर नेते नइखन। समस्या ई बा कि —
सरकारी आवास के समयबद्ध समीक्षा कम होला। प्रभावशाली नेता लोग पर नियम लागू करे में सरकार बदलला के हिसाब से सक्रियता बदल जाले। सत्ता में रहत घरी हर नियम ढीला, विपक्ष में आवते नियम कड़ा होखे लागेला। एही कारण जनता के मन में सवाल उठेला कि कानून सभे खातिर बराबर बा कि ना।
समाधान का हो सकेला?
बिहार सरकार चाहे जेकरो सरकार रहे, कुछ आसान सुधार एह विवाद के हमेशा खातिर खत्म कर सकेला—
हर सरकारी बंगला के ऑनलाइन सार्वजनिक सूची जारी होखे।
केकरा लगे कवन बंगला बा, कब से बा, कवन नियम के तहत बा – सब जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध रहे।
कार्यकाल समाप्त होखे के बाद तय समयावधि का भीतर आवास खाली करावे के व्यवस्था होखे।
नियम के उल्लंघन पर दल, पद आ प्रभाव देखला बिना एक समान कार्रवाई होखे।


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