Category: सतमेझरा

दिल्ली के मेट्रो

– जयन्ती पाण्डेय पिछला दिने लस्टमानन्द दिल्ली गइल रहलन. का कहीं का नजारा रहे. जब से दिल्ली में मेट्रो रेलगाड़ी चले लागल तबसे ओहिजा का लोगन का जिनिगी में बहार आ गइल बा. कालेज जाये वाली बबुनी के रोमांस करे के एगो नया जगहा...

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साधनाजी, उपासनाजी, उर्फ…

– आलोक पुराणिक बाबाजी लोग के हल्ला बा आजुकाल्ह. दिल्ली के बाबा भीमानन्द के कालगर्ली रैकेट देख के इहे समुझ में नइख आवत कि अब बाबाजी लोग के मुहल्ला कवन बा. सगरी मुहल्ला ओहि लोग के लउकत बा. जेकरा के बाबजी बुझऽ उहे कालगर्ल के भँड़ुआ...

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कोलकाता मेल

– भोजपुरिया भईया गरमी से कोलकाता परेशान बाटे… अउर परेशानी त तब बढ़ जाला जब केकेआर हार जाला… खैर कहे वाला कह रहल बा कि आईपीएल के हर मैच… खरीदल बेचल जा रहल बा… का ललित अंकल ई हम का सुन रहल बानी? खैर...

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पत्थर के देश में पत्थर के लोग

– जयन्ती पाण्डे रउआ कहीं चल जाईं, भारत के कवनो कोना में. सब जगहा रउआ पत्थर दिल के लोग भेंटाई. आखिर काहें ना? जेकरा पर जिम्मेदारी बा कि ऊ सबके आदमी बनाई. ओकरो दिमाग में पत्थरे भर गइल बा. हँ, बात मास्टर लोग के कइल जाता. आज...

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भउजी हो!

भउजी हो! का बबुआ? सुनलू हऽ? बहिर थोड़े हईं. कवना बात का बारे में पूछत बानी? सुने में आवत बा कि देश में शौचालय से बेसी मोबाइल हो गइल बा. त एहमें अचरज का बा? एगो शौचालय से कई लोग के काम चल जाला, जबकि एक एक आदमी के दू गो तीन गो...

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