Category: सतमेझरा

नरक में सस्तई

– जयंती पांडेय एक दिन बाबा लस्टमानंद रात में सुतल रहले. अचानक ऊ सपना देखे लगले कि एगो बड़हन मॉल (नया जमाना के बजार) में दोकान देखते – देखते ऊ नरक के दुआर पर पहुंच गइल बाड़े. उनका आगे एक जना अऊरी रहे, जेकरा के बाबा...

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स्पांसरमय मैं सब जग जानी

– आलोक पुराणिक ई सीन सन् 2508 मतलब कि करीब पांच सौ बरीस बाद के ह. स्पांसरमय सब जग जानी, करहु प्रणाम….. – के वचनोच्चार का बाद संत जालीदास रामकथा कहे के तैयारी शुरु कर दिहले बाड़न. स्पांसर जुटावल जा रहल बा. जालीदास के...

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नरक के समर्थन में नेताजी के नारा

– जयंती पांडेय सड़क दुर्घटना में एगो वरिष्ठ नेता के मृत्यु हो गइल. उनकर देह तऽ खैर देश के अमानत रहे, से चारू ओर शोक मनावल जात रहे लेकिन नेताजी के आत्मा के देवदूत लोग स्वर्ग के दुआर पर ले आई के खड़ा कऽ दिहल लोग. दुअरा पर...

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मूस के सीख आ शेर के तमेचा

– जयंती पांडेय ई जान जा भाई, मूस चाहे जवना पार्टी में होखो बाकिर सलाह दिहला से बाज ना आवे. ऊ अपने चाहे जवन करऽ सन बाकिर ई ना चहिहें सन कि लोगो ऊहे करो. अइसने एगो मूस जंगल में भाषण ना दे के सलाह दिहला के सरकारी मिशन पर...

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दोसरा के सतावल भक्ति ना हऽ

– जयंती पांडेय ओह दिन जब भगतजी मुअले, तऽ सबलोग कहऽल – भगतजी स्वर्गवासी हो गइले. पर अब मालूम भइल कि भगतजी, स्वर्गवासी ना, नरकवासी भइले हंऽ. हम कहब तऽ केहू मानी ना, पर इहे सही हऽ कि उनका नरक में डाल दिहल गइल बा आ उन पर...

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