Category: सतमेझरा

बतावऽ तऽ, सबसे बड़हन के

– जयंती पांडेय बड़ा कंफ्यूजन बा जी. आउर ई नेता लोग तऽ मामिला के अउरी फइला रखले बा. जवने घोटाला सामने आवऽता ओही के सबसे बड़हन बता देता लोग. एक बात पर टिकते नइखे लोग. ई जमाना के साथ चले वाला बात ना हऽ. काहे कि जेतना...

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लोकतंत्र के हत्या

भोला बाबू खीसे फनफनाइल रहलें. पुछनी कि का बात हऽ त बिफर पड़लें. कहे लगले, नीतीश त हदे कर दिहलें. अइसनो कइल जाला ? लोकतंत्र के कमजोर कर के राख दिहलें, राहुल गाँधी के बेइज्जत कर दिहलें, आ लालू से पता ना कवना जनम के दुश्मनी निकाल...

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नरक में सस्तई

– जयंती पांडेय एक दिन बाबा लस्टमानंद रात में सुतल रहले. अचानक ऊ सपना देखे लगले कि एगो बड़हन मॉल (नया जमाना के बजार) में दोकान देखते – देखते ऊ नरक के दुआर पर पहुंच गइल बाड़े. उनका आगे एक जना अऊरी रहे, जेकरा के बाबा...

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स्पांसरमय मैं सब जग जानी

– आलोक पुराणिक ई सीन सन् 2508 मतलब कि करीब पांच सौ बरीस बाद के ह. स्पांसरमय सब जग जानी, करहु प्रणाम….. – के वचनोच्चार का बाद संत जालीदास रामकथा कहे के तैयारी शुरु कर दिहले बाड़न. स्पांसर जुटावल जा रहल बा. जालीदास के...

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नरक के समर्थन में नेताजी के नारा

– जयंती पांडेय सड़क दुर्घटना में एगो वरिष्ठ नेता के मृत्यु हो गइल. उनकर देह तऽ खैर देश के अमानत रहे, से चारू ओर शोक मनावल जात रहे लेकिन नेताजी के आत्मा के देवदूत लोग स्वर्ग के दुआर पर ले आई के खड़ा कऽ दिहल लोग. दुअरा पर...

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