Category: सतमेझरा

शतरंज के खेल

भउजी हो ! आईं बबुआ, हम रउरे इन्तजार में रहली हँ. काहे भउजी ? तोहरा कइसे मालूम हो गइल कि हम आवे वाला बानी ? रउरा का सोचीलें हम हरदम चुहानिये में रहीलें ? देश दुनिया के खबर हमरो लगे रहेला. पूछीं का जाने चाहत बानी ? भउजी तू त आजु...

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सरकारी होखे के फायदा

– जयंती पांडेय सरकारी बीवी, बहू, समधिन, समधी लांग लाइफ काम देला लोग, रिटायर हो गइला के बादो. सरकारी होखला के फायदा रिटायर्ड होखला के बादे बुझाला. सरकारी आदमी के अरदवाय बेसी होला, ढेर दिन ले पेंशन खाला. जेतना वेतन ना पावे,...

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कह देब हो राजा रात वाली बतिया

भोला बाबू ओह दिन एगो बारात में शामिल रहलन. महफिल जमल त केहू नाचे वाली के इशारा कर दिहल आ ऊ नाचे वाली आके भोला बाबू के सामने बइठ गइल आ आपन गाना चालू रखलसि. गाना के बोल रहे, “कह देब हो राजा रात वाली बतिया”. भोला बाबू...

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वातावरण बनवले राखऽ भाई

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद के संघतिया एगो बड़हन अखबार में फोटोग्राफर हवें. बड़ भाई दाखिल हवें. एक दिन देस में भ्रष्टाचार के लेके बड़ा चिंता जाहिर कइलें. कवनो काम नइखे होत. उनकर दुख देखि के बाबा कहलें हे भाई सुनऽ. तहरा...

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बतावऽ तऽ, सबसे बड़हन के

– जयंती पांडेय बड़ा कंफ्यूजन बा जी. आउर ई नेता लोग तऽ मामिला के अउरी फइला रखले बा. जवने घोटाला सामने आवऽता ओही के सबसे बड़हन बता देता लोग. एक बात पर टिकते नइखे लोग. ई जमाना के साथ चले वाला बात ना हऽ. काहे कि जेतना...

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