Category: सतमेझरा

अब का का देखाई ई बेलनटाइट !

– जयंती पांडेय चौदह फरवरी सामने आ गइल बा. टेलीविजन पर ए घरी अभिये से “वेलेंटाइण डे” के ढेर परचार होखे लागल बा. केहू अपना वेलेंटाइन के हीरा के अँगूठी देबे के राय देता, त केहू सोना के हार, जेवर त केहू स्टाइलिस्ट...

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भउजी हो !

भउजी हो ! का बबुआ ? गणतंत्र दिवस के बधाई ले लऽ. रउरो के बधाई. बाकिर मुँह काहे बनवले बानी ? का कहीं भउजी, बुझात नइखे कि कइसे विरोध करीं. कवना बाति के ? काश्मीर में तिरंगा नइखे फहरावे दिहल जात एह बाति के, कि मनमोहन सिंह सलाह दिहले...

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ई सरकार का हऽ

– जयंती पांडेय रामचेला एह जाड़ में सबेरे-सबेरे बाबा लस्टमानंद के दुअरा पहुँचले. बाबा घूरा तर बइठल रहले. संगे अउरो दू चार गो लोग रहे. बाबा के दंडवत बोल के राम चेला घूरा के लगे एगो पुअरा के बिड़ई पर बइठ गइले. राम निहोरा खइनी...

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बाल कटाई

एक दिन एगो फूल बेचे वाला आपन हजामत बनवावे सैलून गइल. हजामत का बाद पूछलसि, कतना पइसा ? हजाम जवाब दिहलसि, एको पइसा ना. एह हफ्ता हम समाजसेवा करत बानी. फूल वाला बहुत खुश भइल आ चल गइल. अगिला दिने जब हजाम आपन सैलून खोले चहुँपल त देखलस...

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का हऽ पीएसी अउर जेपीसी के चक्कर

– जयंती पांडेय संसद के आखिरी दिन बाबा लस्टमानंद से रामचेला पूछलें, ई पीएसी आ जेपीसी का हऽ ? केहु नईखे पूछत कि का चाहीं. बस विपक्ष चिल्ला रहल बा कि दूनू चाहीं. आ सरकार के कहल हऽ कि जब एगो बा तऽ दोसरका का होई ? विपक्ष जिदिया...

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