बेबस बूढ़ पुरनिया
– डाॅ. अशोक द्विवेदी बुढ़ापा आदमी के अवसान का पहिले क आखिरी पड़ाव (लास्ट स्टेज) ह. शरीर के कमजोरी आ अक्षमता त बढ़िये जाला, ऊपर से परिवार आ समाज के उपेक्षा आ अपनन के अमानवी तिरस्कार बूढ़-ठेल अदिमी के भितरियो से तूरि देला....
Read More– डाॅ. अशोक द्विवेदी बुढ़ापा आदमी के अवसान का पहिले क आखिरी पड़ाव (लास्ट स्टेज) ह. शरीर के कमजोरी आ अक्षमता त बढ़िये जाला, ऊपर से परिवार आ समाज के उपेक्षा आ अपनन के अमानवी तिरस्कार बूढ़-ठेल अदिमी के भितरियो से तूरि देला....
Read Moreकबो ट्रेन के टाइम त कबो हवाई जहाज के टाइम का चलते अनसोहाते मौका मिल जाला बतकुच्चन से आराम करे के. सोहाव त ना बाकिर कुछ देर ला सोहावन जरूर लागेला. आ आज एहीसे अनसोहाते पर बतकु्च्चन करे के मन बनवले बानी. अब रउरा एहसे अनस आवे, रउरा...
Read More– डाॅ. अशोक द्विवेदी आज फजिरहीं बहरा निकलते झमरझम बरखा से सामन भइल. राजधानी घंटन बरखा से नहात रहे. गाँवे़ं फोन लगाइ के एगो सँघतिया से टोह लेहनी त पता चलल कि उहाँ बादर क नाँवे-निशान नइखे. परसों तनी मनी सीति चाटे भर पानी परल...
Read More– डाॅ. अशोक द्विवेदी चउधुरी साहेब के पम्पिंग सेट जब मर्जी होला तबे चलेला. दस लीटर डीजल दिहला पर, तीन चार दिन दउरवला का बाद एक दिन चलल त रामरतन के बेहन परि गइल आ जब रोपे क बेरा आइल त कीच-कानो भर क बरखा भइल. दू दिन का छिलबिल...
Read Moreबियफे, 6 अगस्त, जंतर मंतर, नई दिल्ली. धरना प्रदर्शन क पेटेन्ट जगह. ‘वन रैंक वन पेंशन’ पर जुटल जुझारू फौजी भाइयन का धरना-शिविर का सटले, सोझहीं हमनियो का “भोजपुरी भाषा के आठवीं अनुसूची में शामिल करे खातिर”...
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