Tag: बतकुच्चन

बतकुच्चन – ८०

ना अँवटब, ना पवढ़ब, ना दही जमाएब. दूधवे उठा के पी जाएब, एके ओरहन रही. बात सही बा. रोज रोज के तकरार, ओरहन, तंज से तंग आ के कवनो चाकर, कवनो सरकार, कवनो भतार एह तरह के फैसला कर सकेला. अब एह पर चँउके के कवनो जरूरत नइखे कि भतार शब्द...

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बतकुच्चन ‍ – ७९

चोट त चोट ह आ कचोट? कचोट के कम चोट समुझे वाला के बुड़बके बुझे के पड़ी. काहे कि कचोट झलके ना भितरे भितर चोट मारत रहेला. देह के चोट त देर सबेर भुलाइओ सकेला आदमी बाकिर मन के चोट, कचोट, भुलावल बहुते मुश्किल होला. आजु जब लिखे बइठल बानी...

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बतकुच्चन ‍ – ७८

ठाँवे-ठाँवे ठठ के ठठ लोग दोसरा के ठोकत-ठेठावत ठाँय-ठाँय करत ठाँव नइखे लेबे देत. संजोग बा दुर्योग से ओहू ठठ के नेता ठए धातु के हउवन स. अब ठए से ठठेरो होला, ठए से ठाकरे आ ठाकुरो होला. ठाकुर के कवनो खास जात ना होखे. बाभनो ठाकुर...

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बतकुच्चन ‍ – ७७

भोजपुरी के पहिला सुपर गायक बलेसर, बालेश्वर राजभर जिनका के लोग बालेश्वर यादव के गलत नाम से बेसी जानेला, के एगो गीत ओह जमाना में बहुत मशहूर भइल रहे. कटहर के कोआ तू खइलऽ त ई मोटकी मुगरिआ के खाई. पिछला दिने मोटा माल के चरचा ढेर चलल...

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बतकुच्चन ‍ – ७६

बारी आ बारी के बाति पिछला बेर बाकी रह गइल रहुवे से ओहिजे से शुरु करत बानी. बारी के एक मतलब होला कतार में पड़ल आदमी भा काम के बारी भा मौका आ दोसर मतलब होला बगइचा. भा समूह. बारी का जगहा कुछ जगहा वारी लागेला . जइसे कि फूल के बगइचा...

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