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कुछ दोहा

-चंदन मिश्र डाढ़ी जर अब गाछ के, बाटे रहल बटोर। आखिर फल कइसे मिली, पत्ता पत्ता चोर॥ जर से ले के डाढ़ तक, केहू ना कमजोर। केहू अधिका ले गइल, केहू थोरका थोर॥ जब घरहिं के लोग कइल, आपन देस गुलाम। जिअते जी जे मर गइल, ओकरा से का काम॥ पानी...

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जा रे झूम के बसंती बहार 

– ओ.पी .अमृतांशु जा रे झूम के बसंती बहार  पिया के मती मार पिया बसेला मोर परदेसवा में . सरसों के फुलवा फुलाईल आमवा के दाढ़ मोजराईल , अंगे-अंगे मोर गदाराइल हाय!उनुका ना मन में समाईल , लाली होठवा भइल टहकार पिया के मती मार...

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हम आग से बारूद सटवले बानी

– अभयकृष्ण त्रिपाठी अरसा बाद एक बार फिर कलम उठवले बानी, जानत बानी हम आग से बारूद सटवले बानी II दीप क रोशनी से अनंत के नाता बा, अन्हरन से देखे क बात हमारा ना सुहाता बा, हर केहू जान के एक दूसरा के लूट रहल बा, डाकू के मंत्री...

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