टैग: भोजपुरी

डर-भय

– डॉ. कमल किशोर सिंह डर बहुरुपिया बनि के आवे, हरदम दिल दुआरी पे. कइसे जान बचाईं आपन, कतना चलीं होशियारी से? चिकन चेहरा से हम डरीं की बढ़ल केश मूँछ दाढ़ी से? भय भगवान से केकरा नइखे, काहे ज्यादा भय पुजारी से ? पढ़ल लिखल लोगन...

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बतकुच्चन – ३

एगो चर्चा में शब्द आ गइल कि रउरा त नायक हईं. बस मन में बिजली जस चमक उठल कि नायक के होला, नायक का ह ? आ याद पड़ल कि पिछला संस्करण में हम बतकुच्चन के दू गो कड़ी लिखले रहुवीं. फेर बात आइल गइल हो गइल आ बतकुच्चन दिमाग से उतरि गइल....

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बड़का के ? मौत, की रुपइया ?

– आशुतोष कुमार सिंह आदमी के सुभाव बुझल बहुते कठिन बा. एकरा के जेतना गहराई से बुझे के प्रयास करीले, ओही अनुपात में अउरी अनबुझाह होत चलि जाले. बाकिर पिछला (30 सितम्बर 2010) के आंखि का सोझा एगो अइसन घटना घटल कि एह मानवीय...

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गीत नया हम गाईं कइसे ?

घात मीत के, बात प्रीत के, खेल कहानी हार जीत के, सबका के बतलाईं कइसे? गीत नया हम गाईं कइसे? दोसरा के का बाति चलाईं अनकर के का दोष देखाईं अपने हार सुनाईं कइसे ? गीत नया हम गाईं कइसे ? अपने चिन्ता, अपने फिकिरे कोल्हू के सभ बैल बनल...

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भोजपुरी के तहस नहस

– आर्य संपूर्णानन्द भोजपुरी के भोजवाली पूरी समुझल केतना नादानी के काम बा, ई खाली पढ़े आ सुने वाली बाति नइखे. बहुते विचार मंथन के बाति बा. आज के माहौल के बाति अगर करीं त ठीक उहे नादानी हमरा भोजपुरिया भाई लोग आज करत बाड़े जा....

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