Tag: भोजपुरी

साल बीत गइल, साल आ गइल

साल का आखिरी दिने आजु जब पिछला साल के लेखा-जोखा लेबे बइठनी त एकाध खास बाति के छोड़ के कुछ ना भेंटाइल. सालो भर एह बहाने भा ओह बहाने भोजपुरी पर आपन-आपन राजनीति चमकावे के कोशिश होत रहल. हर साल का तरह एहू साल भोजपुरी के कई गो विश्व...

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नयका साल

– डॉ. कमल किशोर सिंह एक साल अउर सरक गइल, कुछ छाप आपन छोडि के. भण्डार भरि के कुछ लोगन के , बहुतन के कमर तोड़ि के. प्रकोप परलय के दिखा दुनिया के कुछ झकझोरि के. आईं बिदाई करीं एकर, दसो नोहवा जोड़ी के, आ स्वागत करीं नव वर्ष के...

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हमार सोगहग वापसी

– भगवती प्रसाद द्विवेदी सोगहग लवटब हम तहरा लगे / तहरा में जइसे लवटेले स पखेरू डैना फड़फड़ावत चहचहात ठोर चुँगियावत अपना खोंता में जइसे लगहर गाय के थान से सटल मुँह मारत बछरू लवटेला नाँद आ खूँटा का लगे जइसे लवटेलीं स बिल में...

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पेट से जुड़ले बिना भोजपुरी के विकास नइखे होखे वाला

भोजपुरी के विकास खातिर हमनी के अपना के अपटूडेट करे के पड़ी. अंगरेजी आ हिन्दी के फेरवट वाला भोजपुरी अपनावे के पड़ी. पुरनका परम्परा, लोक गीत, लोक साहित्य के बचवले राखत हमनी के नयका जमाना के जरुरत अनुसार बदले के पड़ी, ना त हमनी का...

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ओका -बोका 

– ओ.पी. अमृतांशु तोर नैना, मोर नैना, मिलके भईले चार. चलऽ खेलल जाई, ओका-बोका नदिया किनार.  नदिया के तीरे-तीरे, बहकि बेयरिया. संघे-संघे उड़ी गोरी, तोहरो चुनरिया. हियना के डाढ़े-पाते, झुमिहें बहार, चलऽ...

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