आरा गान
– शिवानन्द मिश्र रामजी के प्यारा ह, कृष्ण के दुलारा ह, बाबा विसवामीतर के आंखी के तारा ह। बोले में खारा ह, तनीकी अवारा ह, गंगाजी के धारा के नीछछ किनारा ह। गौतमदुआरा ह, भोज के भंडारा ह, सोन्ह गमकेला जइसे दही में के बारा ह।...
Read Moreकलाकार के भीतर छुपे हुए हुनर को लोगो तक पहुचने में देर बिलकुल नहीं लगती. इसका सीधा साधा उदाहरण है गायिका पुष्पलता, जिन्होंने अपनी सुरीली आवाज़ में कई मधुर गीत लोगो के मनोरंजन के लिये गा चुकी हैं! कोलकाता की रहनेवाली पुष्पलता की...
Read More– जयशंकर प्रसाद द्विवेदी कोइला से पटरी पचरल ले के शीशी घोटल सांझी खानि घरे मे माई ले रगड़ के मुंहो पोछल बा के इहवाँ जे दुलराइल नइखे । माई के झिड़की खातिर माटी मे सउनाइल खाड़ हँसे बाबूजी बबुआ बा भकुयाइल अब्बो ले भुलाइल नइखे ।...
Read More– अशोक द्विवेदी ना जुड़वावे नीर जुड़-छँहियो में, बहुत उमस लागे. चैन लगे बेचैन, देश में बरिसत रस नीरस लागे! बुधि, बल, बेंवत, चाकर… पद, सुख, सुविधा, धन, पदवी के लाज, लजाले खुदे देखि निरलज्ज करम हमनी के बुढ़वा भइल...
Read More
पाठक-पाठिकन के राय विचार प्रतिक्रिया..