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भकुआइल बबुआ

– जयशंकर प्रसाद द्विवेदी माटी के थाती छोड़ी जब से पराइल बा, नीमन बबुआ तभिए से भकुआइल बा ॥ जिनगी के अहार न विचार परसार टुटल घर आ दुआर बहत दुखे के बेयार । सोगहग नहीं कुछो कुल्हिए पिसाइल बा ॥ नीमन बबुआ….. हसी ठठा गइल...

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गज़ल

– डा0 अशोक द्विवेदी नेह-छोह रस-पागल बोली उड़ल गाँव के हँसी-ठिठोली. घर- घर मंगल बाँटे वाली कहाँ गइल चिरइन के बोली. सुधियन में अजिया उभरेली जतने मयगर, ओतने भोली. दइब क लीला-दीठि निराली दुख- सुख खेलें आँख मिचोली. हिलल पात,...

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बाबूजी बहुते कुछ समुझवनी ह

– जयशंकर प्रसाद द्विवेदी आजु हमरा के नियरा बईठा के बाबूजी बहुते कुछ समुझवनी ह । दुनियाँ – समाज के रहन सभ हमरा के विस्तार मे बतवनी ह ॥ बाबूजी बहुते कुछ…. राजनीति के रहतब-करतब एने-ओने के ताक-झाँक बोली-ठिठोली के मतलबो आ...

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गज़ल

– डा0 अशोक द्विवेदी कुछ नया कुछ पुरान घाव रही तहरा खातिर नया चुनाव रही । रेवड़ी चीन्हि के , बँटात रही आँख में जबले भेद-भाव रही । अन्न- धन से भरी कहीं कोठिला छोट मनई बदे अभाव रही । भाव हर चीज के रही बेभाव जबले हमनी के ई...

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भोजपुरी भाषी के मातृभाषाई के अस्मिताबोध – 2

– डॅा० जयकान्त सिंह ‘जय’ भारतीय संविधान के आठवीं अनुसूची में मौजूद बाइसो भारतीय भा गैर भारतीय भाषा सब में हिन्दी, उर्दू आ संस्कृत पर आगे चर्चा होई. बाकी अनइसो भाषा के विषय में पहिले जानल जादे जरूरी बा. असमिया...

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