भकुआइल बबुआ
– जयशंकर प्रसाद द्विवेदी माटी के थाती छोड़ी जब से पराइल बा, नीमन बबुआ तभिए से भकुआइल बा ॥ जिनगी के अहार न विचार परसार टुटल घर आ दुआर बहत दुखे के बेयार । सोगहग नहीं कुछो कुल्हिए पिसाइल बा ॥ नीमन बबुआ….. हसी ठठा गइल...
Read More– जयशंकर प्रसाद द्विवेदी माटी के थाती छोड़ी जब से पराइल बा, नीमन बबुआ तभिए से भकुआइल बा ॥ जिनगी के अहार न विचार परसार टुटल घर आ दुआर बहत दुखे के बेयार । सोगहग नहीं कुछो कुल्हिए पिसाइल बा ॥ नीमन बबुआ….. हसी ठठा गइल...
Read More– जयशंकर प्रसाद द्विवेदी आजु हमरा के नियरा बईठा के बाबूजी बहुते कुछ समुझवनी ह । दुनियाँ – समाज के रहन सभ हमरा के विस्तार मे बतवनी ह ॥ बाबूजी बहुते कुछ…. राजनीति के रहतब-करतब एने-ओने के ताक-झाँक बोली-ठिठोली के मतलबो आ...
Read More– डॅा० जयकान्त सिंह ‘जय’ भारतीय संविधान के आठवीं अनुसूची में मौजूद बाइसो भारतीय भा गैर भारतीय भाषा सब में हिन्दी, उर्दू आ संस्कृत पर आगे चर्चा होई. बाकी अनइसो भाषा के विषय में पहिले जानल जादे जरूरी बा. असमिया...
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