भोजपुरी भाषी के मातृभाषाई अस्मिताबोध – 1
– डॅा० जयकान्त सिंह ‘जय’ ‘अस्मिताबोध’ ओह सग्यानी-स्वाभिमान का होला, जेकरा दिल-दिमाग आ मन-मिजाज में अपना आ अपना पुरखन का उपलब्धियन के लेके मान-गुमान के भाव होखे. एकरा खातिर देश-काल-परिस्थिति के...
Read More– डॅा० जयकान्त सिंह ‘जय’ ‘अस्मिताबोध’ ओह सग्यानी-स्वाभिमान का होला, जेकरा दिल-दिमाग आ मन-मिजाज में अपना आ अपना पुरखन का उपलब्धियन के लेके मान-गुमान के भाव होखे. एकरा खातिर देश-काल-परिस्थिति के...
Read Moreभोजपुरी भाषा के संवैधानिक मान्यता दिआवे खातिर मांग करत एगो भोजपुरी प्रतिनिधि मंडल पिछला दिने यूपी के राज्यपाल राम नाईक जी से मिल के उनुका के आपन मांग पत्र सँउपलसि. भोजपुरी भाषा दुनिया के अनेके देशन में इस्तेमाल होले बाकिर अपने...
Read More– डॉ० हरीन्द्र ‘हिमकर’ सीमा के पाती, बॉंची जा एह चिठ्ठी में चीख बा। दिल्लीवालन भूल ना जाईं समाचार सब ठीक बा।। धान-पान सब सूख गइल बा खेत-मजूरा चूक गइल बा। पेट-पेट में कोन्हू नाचत हियरा-हियरा हूक गइल बा। घर में...
Read More– ऋतुराज आजकल रोज हम अखबार पढ़ेनीं अखबार में आइल लेख दू-चार पढ़ेनीं। चोरी, हत्या, गरीबन के लूटल होखेला रोज कुछ बलात्कार पढ़ेनीं।। आजकल रोज हम अखबार पढ़ेनीं अखबार में आइल लेख दू-चार पढ़ेनीं। तेज हो रहल विकास पढ़ेनीं उठ रहल...
Read More– डॅा० जयकान्त सिंह ‘जय’ सन् 1976-77 में, जब हम गाँव के प्राथमिक विद्यालय में तीसरा-चउथा के विद्यार्थी रहीं, ओह घरी हर सनीचर के अंतिम दू घंटी में सांस्कृतिक कार्यक्रम होखे. ओकरा में हमनी कुल्ह विद्यार्थी इयाद...
Read More
पाठक-पाठिकन के राय विचार प्रतिक्रिया..