लईका सयान हो गइल
– विजय मिश्र लइका हनेला जवाब, अब सयान हो गइल बहू अइली घरे, अलगा चुहान हो गइल. पहिला रिस्ता टूटल जाता, नवका रोज धराता ननिअउरा त याद ना आवे, बढ़ल सढ़ुआ नाता. माई बाबू काटे, ससुररिया परान हो गइल बहू अइली घरे, अलगा चुहान हो...
Read More– विजय मिश्र लइका हनेला जवाब, अब सयान हो गइल बहू अइली घरे, अलगा चुहान हो गइल. पहिला रिस्ता टूटल जाता, नवका रोज धराता ननिअउरा त याद ना आवे, बढ़ल सढ़ुआ नाता. माई बाबू काटे, ससुररिया परान हो गइल बहू अइली घरे, अलगा चुहान हो...
Read More– डा॰ शत्रुघ्न पाण्डेय, बाबूजी के हम रहुईं आँखि के पुतरिया राखसु करेजवा में मोर महतरिया आवते ससुरवा अघोरनी रे, सासु कहे कुलबोरनी. हवे मतवाली ह कुलछनी मतहिया सासुजी कहेली खेलवाड़ी ह भुतहिया परल कपार बिया चोरनी रे, सासु कहे...
Read More– डा॰ अशोक द्विवेदी अइसे त प्रकृति के एक से बढ़ि के एक अछूता, अनदेखा मनोहारी रूप ओह विशाल बनक्षेत्र में रहे बाकिर कई गो मुग्ध करे वाला जगह, हिडिमा घूमत-फिरत देखले-जनले रहे. सबेरे माता जब ओके भीम का सँग खुला आहार-बिहार आ...
Read More– डा॰ अशोक द्विवेदी स्नान-पूजा का बाद जब कुन्ती अनमनाइल मन से कुछ सोचत रहली बेटा भीम का सँगे बाहर एगो फेंड़ का नीचे हँसी-ठहाका में रहलन स. हिडिमा के पास आवत देखि कुन्ती पुछली – – ‘बेटी ए स्थान के आसपास, कहीं...
Read More– देवेन्द्र कुमार गुलजारी लाल जी आपन संघतिया मनमौजी के संगे साप्ताहिक बाजार मंगला हाट में हफ्ता भर के जरूरी सामान के खरीदारी करे खातिर गइल रहलें. दूनो संघतिया बाजार में घूमत-फिरत आपन जरूरत के मुताबिक सर-सामान खरीदत रहलें....
Read More
पाठक-पाठिकन के राय विचार प्रतिक्रिया..