Tag: भोजपुरी

महानगर अउर जिलन के, का बतलाई हाल?

– नर्वदेश्वर पाण्डेय देहाती मंदिर में मंथन भइल, मिली जाम से मुक्ति? जाम-झाम क नाम पर, आपन-आपन युक्ति.. नगर निगम में धांधली, गेट में ताला बंद. लाठी चार्ज में बहल लहू,ऊपर से शांतिभंग.. महानगर में रोज मिलें, मरल-परल नवजात....

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बनचरी (भोजपुरी के कालजयी उपन्यास के सतवीं कड़ी)

– डा॰ अशोक द्विवेदी फजीर होते, भीम आश्रम से निकलि के सीधे जलाशय का ओर चल दिहलन. माता के प्रातः दरसन आ परनाम का बाद, उनसे कुछ सलाह निर्देश मिलल. माता कहली, ”हम चाहत बानीं कि तूँ हिडिमा का सँगे अधिका से अधिका समय बितावऽ!...

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नवगीत

– गंगा प्रसाद अरुण संता, जाने कइसन महभारत फेर आइल बाटे चकराबिहू रचाइल बाटे ना! केकर कइसे गोड़ कबारीं केकरा के कइसे हम जारीं डेगे-डेग इहाँ पर लाखा-घर सिरजाइल बाटे चकराबिहू रचाइल बाटे ना! अनकर अस्तर-सस्तर बोले बीचे धरम-जूझ...

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लईका सयान हो गइल

– विजय मिश्र लइका हनेला जवाब, अब सयान हो गइल बहू अइली घरे, अलगा चुहान हो गइल. पहिला रिस्ता टूटल जाता, नवका रोज धराता ननिअउरा त याद ना आवे, बढ़ल सढ़ुआ नाता. माई बाबू काटे, ससुररिया परान हो गइल बहू अइली घरे, अलगा चुहान हो...

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सासु कहे कुलबोरनी

– डा॰ शत्रुघ्न पाण्डेय, बाबूजी के हम रहुईं आँखि के पुतरिया राखसु करेजवा में मोर महतरिया आवते ससुरवा अघोरनी रे, सासु कहे कुलबोरनी. हवे मतवाली ह कुलछनी मतहिया सासुजी कहेली खेलवाड़ी ह भुतहिया परल कपार बिया चोरनी रे, सासु कहे...

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