Tag: भोजपुरी

जेएनयू के भारतीय भाषा केन्द्र में भइल परिचर्चा आ काव्यपाठ

“‘पाती’ पत्रिका भोजपुरी रचनाशीलता के आंदोलन के क्रांति-पताका हऽ. ‘पाती’ माने, नयकी पीढ़ी के नाँवे सांस्कृतिक चिट्ठी. एगो चुपचाप चले वाला सांस्कृतिक आंदोलन हवे ‘पाती’, जवना के अशोक द्विवेदी अपना संसाधन से चुपचाप चला रहल...

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भोजपुरी लिखे पढ़े के कठिनाई आ काट

– डा॰ प्रकाश उदय भाषा-विज्ञान में जवना के भाषा कहल जाला, तवना में, जवन कहे के होला, जतना आ जइसे, तवन कहा पाइत ततना आ तइसे, त केहू के ‘आने कि’, ‘माने कि’, ‘बूझि जा जे’ भा ‘जानि जाईं...

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रहे एगो आस रे…

– ओमप्रकाश अमृतांशु डहके मतरिया रे , छछनेली तिरिया, बाबुजी बांधत बाड़न, बबुआ के लाश रे, जिनिगी के जिनिका पे रहे एगो आस रे. ढरकत लोरवा के छोरवा ना लउके, भइल सवार खून माथवा पे छउंके, पारा-पारी सभेके धोआइल जाता मंगिया, बाबुजी...

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‘सूर्पनखा’ का नाक के चलते असों होली ना मनाइब.

– नर्वदेश्वर पाण्डेय देहाती मनबोध मास्टर दुखी मन से कहलें – असों होली ना मनाइब. मस्टराइन पूछली- काहें? ऊ कहलें – सूर्पनखा की नाक की चलते. बात सही बा. जहां-जहां गड़बड़ बा, बूझीं सूर्पनखा के नाक फंसल बा. हम्मन क...

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महानगर अउर जिलन के, का बतलाई हाल?

– नर्वदेश्वर पाण्डेय देहाती मंदिर में मंथन भइल, मिली जाम से मुक्ति? जाम-झाम क नाम पर, आपन-आपन युक्ति.. नगर निगम में धांधली, गेट में ताला बंद. लाठी चार्ज में बहल लहू,ऊपर से शांतिभंग.. महानगर में रोज मिलें, मरल-परल नवजात....

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