टैग: भोजपुरी

औरत आ जुआ

– डॉ॰ उमेशजी ओझा औरत आपन पुरा उमिर अपने-आप के सुहरावे आ सम्हारे में परेशान रहेली. काहे कि हमनी के पुरूष प्रधान देश में औरतन के डेग-डेग प आहत कइल जाला. ई लोग समाज में आर्थिक नजर से अपना पति भा कवनो मरद प निर्भर रहे वाली...

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बनचरी (दुसरकी कड़ी)

– डा॰ अशोक द्विवेदी भयावह आ भकसावन लागे वाला ऊ बन सँचहूँ रहस्यमय लागत रहे. जब-तब उहाँ ठहरल अथाह सन्नााटा अनचीन्ह अदृश्य जीव जन्तु भा पक्षियन का फड़फड़ाहट से टूट जात रहे. थोरिके देर पहिले फेड़ का एगो लटकल डाढ़ि से लपटाइल लटकल...

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दू गो कानून बा

– डी आनन्द पानी से सस्ता गरीबन के खून बा, लागऽता देसवा में दू गो कानून बा. जे बा छूछे ओकरा, काहे केहू पूछे, दुनिया-जहान, बिना पइसा के सून बा. केस लटियाइल ब‌ा, सरसो के तेल बिना, बड़का लोगवा खातिर, तेल जैतून बा. ओकर सभे...

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विश्वस्तरीय ट्रेन सफर के माजा खतम हो जाई

– जयंती पांडेय रेलगाड़ी आ रेलवे टीसनन के वर्ल्ड क्लास बनावे के चरचा जोर पर बा. मोदी जी दनादन विदेश जा रहल बाड़े आ उहां से फटाफट विचार ले के चल आव तारे. जब बाबा लस्टमानंद ई बात सुनले कि रेलवे टीसनन के हवाई अड्डा अइसन बनावल...

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बनचरी (पहिला कड़ी)

– डा॰ अशोक द्विवेदी गंगा नदी पार होत-होत अँजोरिया रात अधिया गइल रहे. दुख आ पीरा क भाव अबले ओ लोगन का चेहरा प’ साफ-साफ देखल जा सकत रहे. छछात मृत्यु का सामने से, सुरक्षित लवटि आइल साधारन बात ना रहे. संजोग अच्छा रहे कि असमय आ...

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