Tag: भोजपुरी

दास मलूका कह गए सबके दाता राम !

– विकास अजगर करे ना चाकरी पंछी करे न काम, दास मलूका कह गए सबके दाता राम ! चलीं तनी एह जानल सुनल कहावत के व्याख्या कइल जाव. सोचल जाव कि आखिर अजगर चाकरी काहे ना करे, पंछी काम काहे ना कर सँ आ आखिर राम का लगे देबे खातिर अतना...

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दिल्ली में मेहरारुन के दुर्दशा

दिल्ली के भोजपुरी मैथिली अकादमी द्वारा आयोजित नाट्य समारोह में महापंडित राहुल सांस्कृत्यायन के लिखल भोजपुरी नाटक “मेहरारुन के दुर्दशा” के मंचन करावल गइल. नाटक के एगो पात्र के सवाल रहे, “ऐ यशोधरा जानत हऊ, सनातन...

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फागुन के आसे

– रामरक्षा मिश्र विमल फागुन के आसे होखे लहलह बिरवाई. डर ना लागी बाबा के नवकी बकुली से अङना दमकी बबुनी के नन्हकी टिकुली से कनिया पेन्हि बिअहुती कउआ के उचराई. फागुन के आसे होखे लहलह बिरवाई. फागुन के आसे होखे लहलह बिरवाई....

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अमौसा के मेला

– कैलाश गौतम प्रसिद्ध कवि कैलाश गौतम के एगो रचना उहें के आवाज में प्रस्तुत कइल जा रहल बा जवन एगो कवि सम्मेलन में पेश भइल रहे. पूरा ट्रांस्क्रिप्ट जस के तस दिहल जा रहल बा काहे कि ओकर अनुवाद के कवनो जरुरत नइखे लागत. कवि अपना...

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वसंत कहीं नइखे भुलाइल

– पाण्डेय हरिराम जाड़ा आहिस्ता से मौसम के गाल चूमलसि त मौसम का रग में गर्मी दउड़ि गइल…. लोग कहल वसंत आ गइल. फगुआ आ गइल. आ आजु साँचहू के फगुआ ह. बाकिर कहवाँ… काल्हु सँझिया एगो पड़ोसिन बतवली कि सड़कन पर रौनक नइखे....

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