– टीम अंजोरिया
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पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन
president rule in west bengal
मथैला देखि के रउरो सोचले होखब कि मोदी सरकार जइसन डेरापूत सरकार में अतना हिम्मत कइसे आ गइल ? त सोचनी कि काहे ना विस्तार से राष्ट्रपति शासन के चरचा कर लीहल जाव।
बरीस 1950 का बाद से देश में 134 बेर राष्ट्रपति शासन लगावल गइल बा। एहमें सबले बेसी एगारह बेर मणिपुर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगावल गइल बा। आ सबले बेसी दिन ला गिनाव त जम्मू कश्मीर में कुल मिला के बारह बरीस ले राष्ट्रपति शासन रहल बा। राष्ट्रपति शासन लगावे के पहिलका एलान जून 1951 में पंजाब राज्य ला कइल रहुवे। आ सबले बेसी राष्ट्रपति शासन लगावे के सम्मान कहीं भा अछरंग कांग्रेस के सरकारन का नामे दर्ज बा।
अब अइसनो नइखे कि मोदी सरकार देश के कवनो राज्य में एको बेर राष्ट्रपति शासन नइखे लगवले। बाकिर इहो नइखे कि ऊ इन्दिरा गाँधी जइसन पचासन बेर अइसन कइले होखसु। इन्दिरा गाँधी के प्रधानमंत्री रहला का दौरान लगभग पचास बेर कवनो ना कवनो राज्य में राष्ट्रपति शासन लगावल गइल रहुवे। अधिकतर बेर त ई विरोधी दल के सरकार गिरावे खातिर होखत रहुवे आ कबो कबो अपनो पार्टी के कवनो मुख्यमंत्री के हटावे ला।
मौनमोहन सिंह के नाम से जनाए जाए वाला मनमोहन सिंह के सरकार का दौरान देश में करीब एक दर्जन बेर राष्ट्रपति शासन लगावल गइल रहुवे। अधिकतर त त्रिशंकु विधानसभा का चलते अइसन करे के मजबूरी रहुवे।
अजातशत्रु कहाए वाला अटल बिहारी बाजपेयी के सरकारो का दौरान देश के कवनो राज्य में पांच बेर राष्ट्रपति शासन लगावल गइल रहल।
आ मौजूदा प्रधानमंत्री नरेन्द्रो मोदी का जमाना में अइसन नौ बेर हो चुकल बा।
मोदी सरकार सितम्बर 2014 में महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगवले रहल काहे कि कांग्रेस-राकांपा गठबन्हन के सरकार गिर गइल रहुवे।
फरवरी 2015 में दिल्ली में केजरीवाल अपने इस्तीफा दे दिहले रहुवन जवना का बाद राष्ट्रपति शासन लगावल गइल रहल।
जनवरी 2016 मे राजनीतिक संकट अइला का चलते अरुणांचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगा दिहल गइल रहुवे जवना के सुप्रीम कोर्ट निरस्त कर दिहलसि आ फेरु कांग्रेसे के सरकार बनल।
मार्च 2016 में अइसने राजनीतिक संकट का नाम पर उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगावल गइल रहुवे। सुप्रीम कोर्ट एकरो के असंवैधानिक बता दिहले रहुवे आ विधानसभा में पत विभाजन करा के फेरु सरकार बरकरार रह गइल रहुवे।
एह दू बेर के अनुभव से मोदी सरकार एक तरह से किरिए धर लिहलसि कि अब से ऊ ‘राजनीतिक संकट’ का नाम पर राष्ट्रपति शासन ना लगाई।
आ एहिजे तनी बहक के एगो कहानी सुनावे के मन कर गइल बा। एक बेर के बात ह कि एगो साधु एगो नाग के सिखवले कि केहू के कटीहऽ जिन। नाग उनुकर बात मान लिहलसि। फेरु कुछ बरीस का बाद ऊ साधु ओही तरफ से फेरू गुजरलन त देखलन कि नाग घवाहिल होके पड़ल बा। पूछलन कि अइसन हाल काहे हो गइल तोहार? नाग कहलसि कि रउरे नू कहले रहीं कि केहू के कटीहऽ मत। साधु अपना कपारे हाथ ध लिहलन। कहलन कि अरे भाग्यवान हम काटे से मना कइले रहीं फूफकरला से ना नू?
मोदी सरकारो के इहे हाल हो गइल बा। अगर देश के कवनो राज्य में राष्ट्रपति शासन लगावल सबले जरूरी बा त पश्चिम बंगाल में। बाकिर मोदी सरकार काटल त दूर फूफकारहूं के जीवट नइखे देखावत।
फेरु राष्ट्रपति शासन वाला विषय पर लवटत बानी। मोदी सरकार का दौरान जून 2018 में जम्मू कश्मीर के महबूबा मुफ्ति के सरकार गिरा के राष्ट्रपति शासन लगा दिहल गइल। एकरा बादे जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटावे के काम हो सकल आ एक देश में एक विधान वाला हालात बन पावल। ना त जम्मू कश्मीर के अलगे संविधान रहत रहुवे।
नवम्बर 2019 में महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगावे पड़ल काहे कि कवनो गोल का लगे स्पष्ट बहुमत ना रहुवे आ गठबन्हन बना के चुनाव जीतला का बाद भाजपा-शिवसेना गठबन्हन से शिवसेना मुकर गइल रहुवे।
फरवरी 2021 में पुडूचेरी में विधायकन का इस्तीफा का चलते कांग्रेस सरकार अल्पमत में आ गइल आ ओहिजा राष्ट्रपति शासन लगावल मजबूरी हो गइल रहल।
मणिपुर में कानून व्यवस्था बिगड़ला का चलते मोदी सरकार भाजपे के सरकार हटा के ओहिजा फरवरी 2025 में राष्ट्रपति शासन लगा दिहलसि। अगस्त में एह राष्ट्रपति शासन के अवधि बढ़ा के 4 फरवरी 2026 ले राखल गइल रहल। अब ओहिजा फेरू भाजपा सरकार बन गइल बा आ एन. बीरेन सिंह का जगहा अब युमनाम खेमचंद सिंह भाजपा गठबन्हन के सरकार के नेतृत्व कर रहल बाड़न।
अब एह चरचा का बाद साधुबाबा आ नाग के कहानी फेरु इयाद करावत पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन के जरुरत पर लवटत बानी। पिछला दिने मालदा में जवन भइल तवना का बाद देश के सुप्रीम कोर्टो कपार ध लिहलसि कि कइसन बदमिजाज सरकार बिया ओहिजा। नौ घंटा ले एसआईआर के काम में लागल सात गो न्यायायिक अधिकारियन के बंधक बना के रखला का चलते देश के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रात के दू बजे ले जाग के ओह लोग के मुक्त करवावे ला मजबूर कर दिहलन स्थानीय प्रशासन के।
VIDEO | West Bengal poll: CM Mamata Banerjee (@MamataOfficial) at a poll rally in Nanoor, “We had been in opposition in Bengal but never indulged in riots.”
(Full video available on PTI Videos – https://t.co/n147TvrpG7) pic.twitter.com/vmqeo8SzAN
— Press Trust of India (@PTI_News) April 1, 2026
पिछला विधानसभा चुनाव 2021 के कहानी केहू भुलाइल ना होखी। चुनाव जीतला का बाद तृणमूल समर्थक जतना बेरहमी से भाजपा समर्थकन पर अत्याचार कइले सँ तवना के भुलाइल पाप जइसन होखी। अबकियो ममता खुलेआम कहत बाड़ी कि चुनाव का बाद उनुके आवे के बा से लोग सोच के समझ के वोट करे। खेला होबे। केहू रोकते पारबे ना। हालांकि एसआईआर करा के चुनाव आयोग उनुकर खेला बहुत हद ले बिगाड़ चुकल बिया। तबहियों ओहिजा के लोग के हड्डी में समा चुकल ममता के डर खतम होखे के नाम नइखे लेत।
त का कवनो अइसन तरीका बा जवना से पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगा दिहल जाव आ ना त संविधान के अनदेखी होखो ना जनमत के ? हमरा समुझ से अगर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरका दौर के मतदान पड़ला का बाद कवनो चैनल पर एक्जिट पोल के चरचा शुरु होखो ओकरा से पहिले ओहिजा कुछ समय ला राष्ट्रपति शासन लगा दिहल जाव। मतगणना का बाद जेकरे जीत होखो ओकर सरकार बनवा दिहल जाव एकइस दिन बाद। एहसे चुनाव बाद होखे वाली हिंसा पर काबू कइल जा सकी आ जवने सरकार बनी तवन आपन काम सम्हार ली। जनमत के सम्मानो हो जाई आ जानमाल के सुरक्षो। दिक्कत एके गो बा। ऐ छूछा तोहके के पूछा ? दुनिया में भोजपुरी में शुरु होखेवाला अंजोरिया डॉटकॉम के जब भोजपुरिए वाला ना देखसु तब सरकार कहाँ से देख पाई। आ सरकार तक ले आपन बात चहुँपावे के कवनो तरीका हमरा मालूमे नइखे। एहिसे जवन कहे के मन करेला एहिजे कह लेनी। जंगल में मोर नाचल केहू देखे भा ना देखे!


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