आआपा (AAP) के सातगो राज्यसभा सांसद भाजपा में

– टीम अंजोरिया

#केजरीवाल #आआपा #भाजपा

arving kejriwal after defection आम आदमी पार्टी (आप) के सात गो राज्य सभा सांसद 24-04-2026 के भाजपा के दामन थाम लिहलें. ऊ लोग कहल कि ‘आप’ अपना राजनीतिक सिद्धांत से भटक गइल रहे, जेकरा वजह से ऊ लोग पार्टी छोड़त बा. एगो सांसद कहलें कि “हम कैम्ब्रिज अउरी कइयन गो विदेशी संस्थानन में पढ़नी अउर पढ़ौनी, आपन सुनहरा भविष्य छोड़ के ‘आप’ में अइनी, बाकी अब इहाँ रहल मुश्किल हो गइल बा”

पार्टी छोड़े वाला सातो सांसद एक सुर में कहलें कि जवना सिद्धांत से प्रेरित होके ऊ लोग आइल रहे, उ अब खतम हो गइल बा. एकर मतलब ई भइल कि ऊ लोग अबहूँ भारत के भ्रष्टाचार मुक्त बनावल चाहत बा. जवना पार्टी में भ्रष्टाचारी ना होखिहें, उहे देश के भ्रष्टाचार से मुक्ति दिला सकी.

आज के तारीख में खाली भाजपा देश के भ्रष्टाचार से मुक्त करा सकेले, भ्रष्टाचारियों के जेल भेज सकेले, अउरी विदेश में जमा करिया धन वापस ला सकेले. लोकपाल के मजबूत बना के एगो ईमानदार सरकार बनावल जा सकेला, जहाँ भ्रष्टाचारियों खातिर रंचोमात्र जगह नइखे.

राजनीति के वर्तमान चक्र

जे भ्रष्टाचारी नइखे, ओकरा ईडी (ED) से डर ना लागी. ऊ अपना सिद्धांत खातिर लड़ी, संघर्ष करी अउरी जेल जाए से ना डराई. जनता ओकरा पर भरोसा करी कि ऊ न बिकाई, न डेराई अउरी आपन वादा से कबहू ना भटक सकी.

बाकी कहल जाय कि आज राजनीति में कवनो सिद्धांत बाचल बा? ना, आज ई खाली धनपशुवन के खेल बन गइल बा.

  • धन से खरीदल वोट

  • वोट से बनल सरकार

  • सरकार से बनल काला धन

  • काला धन के रक्षक ईडी

  • ईडी के रक्षक सरकार

  • अउरी सरकार के रक्षक ईडी

‘आप’ एही चक्र में फंस गइल. ईमानदार सरकार के वादा कइले आइल ‘आप’ जल्दिये समझ गइल कि खाली बारकोड से पइसा जमा ना होई. एकरा खातिर धनपशुवन के साथ राखे के पड़ी, टिकट बेचे के पड़ी अउरी पइसा उगाही के नीति बनावे के पड़ी, तबही सत्ता रही.

एही लालच में ‘आप’ धनवान लोगन के राज्यसभा के टिकट बेच दिहलस. धनवान लोग खातिर “बाप बड़ा न भैया, सबसे बड़ा रुपैया” होला. ऊ जेल काहे जाई? ओकर कवनो राजनीतिक सिद्धांत थोड़े बा!

“बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होय”

कहावत बा कि “जे दोसरा खातिर गढ़हा खनेला, उ खुद ओही में गिरेला”, ‘आप’ संघर्ष करे वाला अउरी सिद्धांतवादी लोगन के बाहर के रास्ता देखा दिहलस. अरविंद केजरीवाल के आज समझ में आवत होई कि धोखा का होला. संजय सिंह चाहे जतना चिल्ला लस कि पंजाब के लोग भाजपा के सबक सिखईहें, बाकी अइसन कुछ ना होई.

जब ऊ टिकट बेचत रहलें, तब का पंजाब के लोग से पूछले रहलें? पंजाब अब अगिला बंगाल होई. चुनाव आयोग अब सक्षम बा कि हर हेर-फेर के पकड़ सके, अब साफ-सुथरा चुनाव खातिर राष्ट्रपति शासन के जरूरत नइखे.

“होइहि सोइ जो राम रचि राखा”

सात गो सांसद के गइला पर ‘आप’ के रोवे के जरूरत नइखे। रामचरितमानस के चौपाई बा:

“होइहि सोइ जो राम रचि राखा। को करि तर्क बढ़ावै साखा॥”

“होइहि सोइ जो राम रचि राखा” “राम” शब्द से भाजपा के समझे के भूल मति करीं. रामचरित मानस के ई चौपाई के मतलब ई बा कि “भाग में जे लिखल बा, उहे होके रही. फालतू के तर्क-वितर्क कइला से खाली परेशानी बढ़ेला”

आज केजरीवाल अउरी ‘आप’ भाजपा से लड़े के हैसियत में नइखे। ऊ लोग अपना सफर में जवन कुकर्म कइले बाड़न, ओकर फल त मिलबे करी। आज मोदी के कवनो राजनीतिक विकल्प नइखे.

0 Comments

Submit a Comment

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Recent Posts